सकलडीहा में ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ में डीएम हाई वोल्टेज

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अनुपस्थित अफसरों पर कार्रवाई, फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले लेखपालों को खरी-खोटी।

चंदौली जिले के सकलडीहा तहसील में शनिवार को आयोजित ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ में जिलाधिकारी ने जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना और विभिन्न विभागों के नदारद अधिकारियों पर गरजते हुए कड़ी कार्रवाई व वेतन रोकने के सख्त निर्देश जारी किए। यह आयोजन उत्तर प्रदेश शासन की प्राथमिकता के तहत जनता की शिकायतों का पारदर्शी और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए किया गया था, जहां डीएम ने मौजूदगी दर्ज कराई और अनुपस्थितियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई।

अनुपस्थित अफसरों पर डीएम की सख्ती, जांच के आदेश
कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विभागों जैसे राजस्व, सिंचाई और विकास खंड के अधिकारी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर डीएम ने तुरंत जांच कराने और उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वेतन रोकने की धमकी ने अफसरों में हड़कंप मचा दिया। मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी जैसे पुलिस अधीक्षक (एसपी), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और अन्य ने डीएम के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया।

फर्जी रिपोर्ट पर लगाम: लेखपालों को मौके पर जांच का सख्त आदेश
डीएम ने लेखपालों पर सबसे ज्यादा निशाना साधा, जो अक्सर फर्जी या बिना मौके पर जाकर तैयार की गई रिपोर्टें जमा करते हैं। उन्होंने साफ लहजे में कहा, “फर्जी रिपोर्ट बनाने वालों के खिलाफ कोई रहम नहीं होगा। अब हर शिकायत पर सीधे मौके पर जाकर त्वरित निस्तारण करें।” इसके लिए ‘स्कैन मेमो’ जैसी नई डिजिटल तकनीक का उपयोग अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए, जो रिपोर्ट की प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगी। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित आवेदनों के निपटारे को तेज करेगा।
जनता की मार्मिक शिकायतें: 10 साल से इंतजार कर रही विधवा की आवाज
कार्यक्रम में दर्ज शिकायतों में सबसे भावुक मामला धरहरा गांव की एक विधवा महिला का था, जिन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त तो मिल गई, लेकिन 10 साल बीतने के बावजूद दूसरी किस्त नहीं पहुंची। डीएम ने तत्काल संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि इस मामले का 15 दिनों में निस्तारण हो। अन्य शिकायतों में भूमि विवाद, राशन वितरण और सिंचाई सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख थे, जिन पर मौके पर ही कार्रवाई शुरू कर दी गई।
यह ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ न केवल जनता को न्याय का भरोसा दिलाने वाला साबित हुआ, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी। डीएम की इस सख्ती से स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सुधार की उम्मीद जगी है।

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