धानापुर नाजमा हमला कांड: जब पीड़िता का बयान दर्ज हो चुका है तो कार्रवाई में देरी क्यों, महीने भर बीतने को है,आखिर किसके दबाव में है पुलिस?
धानापुर में 17 सितंबर को नाजमा बानो पर हुए जानलेवा हमले के करीब एक महीने बाद भी गिरफ्तारी को लेकर असमंजस बना हुआ है। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। माले नेता श्रवण कुशवाहा ने न्याय नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। अब पुलिस की आधिकारिक जानकारी और निष्पक्ष जांच से ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

धानापुर, चंदौली। नाजमा बानो पर हुए जानलेवा हमले को करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची पीड़िता अब घर लौट चुकी है। परिजनों का दावा है कि उसने पुलिस को अपने बयान में घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान भी बताई है। इसके बावजूद गिरफ्तारी की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या जांच पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव है? परिजन इन सवालों का जवाब मांग रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है।
मजार के पास गंभीर हालत में मिली थी नाजमा
धानापुर कस्बे के वार्ड नंबर छ: निवासी मोहम्मद यूनुस शाह की करीब 18 वर्षीय बेटी नाजमा बानो 17 सितंबर को रायपुर-जगनिया मार्ग स्थित एक मजार के पास गंभीर रूप से घायल और बेहोशी की हालत में मिली थी। उसके गले पर चोट के गंभीर निशान थे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए वाराणसी स्थित ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था।
घटना ने इलाके में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया था। इलाज के बाद नाजमा घर लौट आई है, लेकिन परिवार की चिंता अभी खत्म नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि जब पीड़िता का बयान दर्ज हो चुका है, तो मामले में अब तक हुई कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है?
पहचान बताने का दावा, फिर भी गिरफ्तारी पर सवाल
नाजमा के पिता यूनुस शाह का कहना है कि उनकी बेटी ने पुलिस को घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान बताई है। इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी नहीं मिलने से परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
यूनुस शाह ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यदि आरोपी किसी दूसरे समुदाय से जुड़ा होता, तो अब तक बुलडोजर कार्रवाई हो चुकी होती। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़िता की बड़ी बहन ने भी आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है। परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घर पर एक सिपाही की तैनाती किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, सुरक्षा के लिए पुलिस की मौजूदगी के बावजूद परिजनों की मुख्य चिंता यही है कि मामले में ठोस कार्रवाई कब होगी।
पुलिस के बयान और स्थानीय दावों में विरोधाभास
मामले में असमंजस तब और बढ़ गया, जब स्थानीय लोगों ने दावा किया कि नाजमा के बयान के बाद शाम करीब सात बजे पुलिस सोनू मौर्य को अपने साथ ले गई थी। लोगों का कहना है कि उन्होंने उसे पुलिस के साथ जाते देखा था।
दूसरी ओर, थाना प्रभारी सूर्यप्रकाश मिश्रा ने सोनू मौर्य की गिरफ्तारी से इनकार किया है। पुलिस के बयान और स्थानीय लोगों के दावों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि पुलिस आधिकारिक रूप से बताए कि संबंधित व्यक्ति से पूछताछ हुई थी या नहीं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।
किसी व्यक्ति को पुलिस के साथ जाते देखना अपने आप में गिरफ्तारी का प्रमाण नहीं है। इसलिए इस मामले में अटकलों के बजाय आधिकारिक जानकारी और साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
बताया जा रहा है कि सोनू मौर्य के पिता भी इस मामले में चंदौली के पुलिस अधीक्षक से गुहार लगा चुके हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करे, ताकि पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों के बीच बना असमंजस दूर हो सके।
माले नेता की चेतावनी, न्याय के लिए सड़क पर उतरने का ऐलान
17 सितंबर को हुई इस जघन्य घटना के बाद अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी न होना कानून-व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। चंदौली एसपी आकाश पटेल से हमारी मांग है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो, दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
मामले को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के नेता श्रवण कुशवाहा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो अखिल भारतीय किसान महासभा और कम्युनिस्ट पार्टी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी।
आखिर कब दूर होगा परिजनों का डर?
गंभीर हमले का शिकार हुई युवती का अस्पताल से घर लौटना राहत की बात है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया को लेकर बनी अनिश्चितता परिवार के लिए परेशानी का कारण है। करीब एक महीने बाद भी यदि गिरफ्तारी और जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो पुलिस को सामने आकर तथ्यों के आधार पर जवाब देना चाहिए।
परिजनों ने कार्रवाई में देरी को लेकर प्रभावशाली लोगों के दबाव की आशंका जताई है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकती है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब जरूरत है स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष कार्रवाई की।
पुलिस को बताना चाहिए कि मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, पीड़िता के बयान के आधार पर जांच कहां तक पहुंची है और गिरफ्तारी की स्थिति क्या है। न्याय में देरी से उपजे सवालों का समाधान केवल पारदर्शी कार्रवाई से ही संभव है।