धानापुर में चोरों के आगे बौना पड़ी पुलिस, घरों से लेकर मंदिरों तक चोरों का आतंक; काली माता का मुकुट चोरी

धानापुर में चोरी की घटनाएं अब छिटपुट वारदातों का मामला नहीं रह गई हैं। घरों की चौखट से शुरू हुआ चोरों का दुस्साहस अब मंदिरों की देहरी तक पहुंच चुका है। महीनों से सामने आ रही घटनाएं पुलिस की गश्त और अपराध नियंत्रण की रणनीति की परीक्षा ले रही हैं। हर नई चोरी के साथ जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। अब आश्वासन नहीं, पुराने मामलों का खुलासा, चोरों की गिरफ्तारी और चोरी गए सामान की बरामदगी जरूरी है।

कई महीनों से लगातार हो रहीं वारदातें, नरौली से आवाजापुर और मुख्य बाजार तक चोरों की दस्तक; पुराने मामलों का खुलासा नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

धानापुर, चंदौली। धानापुर थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले इस कदर बुलंद होते जा रहे हैं कि अब घरों और दुकानों के बाद मंदिर भी उनके निशाने पर आ गए हैं। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बीच बुधवार की रात धानापुर कस्बा स्थित वार्ड नंबर छह के काली माता मंदिर से चोर चांदी का मुकुट और देवी की आंखें चोरी कर ले गए। धार्मिक स्थल में हुई इस वारदात ने श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के साथ ही पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई महीनों से धानापुर थाना क्षेत्र में चोरी की वारदातें लगातार सामने आ रही हैं। कभी मंदिरों के ताले टूट रहे हैं तो कभी घरों में घुसकर नकदी और लाखों के आभूषण पार किए जा रहे हैं। घटनाओं का सिलसिला थमने के बजाय नए इलाकों तक फैलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस हर घटना के बाद मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल तो करती है, लेकिन चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश और पुराने मामलों के खुलासे को लेकर अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं।

मंदिरों से शुरू हुई चोरी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

14 जून 2026 को नरौली गांव में एक ही रात चोरों ने तीन मंदिरों को निशाना बनाया। सरजू दास कुटी, वीर बाबा, भगवान शंकर और हनुमान मंदिरों से चांदी के मुकुट, पीतल के घंटे और पूजा के बर्तन चोरी होने की खबर सामने आई। इससे पहले बुद्धपुर और रसूलपुर के मंदिरों में भी चोरी की घटनाएं हुई थीं। लगातार धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया था।

फोटो -मौके पर मौजूद 112 नंबर पुलिस 

20 अगस्त 2026 को धानापुर कस्बा स्थित काली माता मंदिर में चोरों ने फिर वारदात की। मंदिर से करीब 20 किलो का पीतल का घंटा और चांदी की सात आंखें चोरी कर ली गईं। सुबह पूजा के लिए पहुंचे लोगों को घटना की जानकारी हुई तो मंदिर परिसर में भीड़ जुट गई। उस समय भी पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की गई थी।

घरों में लाखों की चोरी, फिर भी नहीं थमा सिलसिला

23 सितंबर के आसपास धानापुर ब्लॉक मुख्यालय के पास हनुमान मंदिर से चांदी का मुकुट चोरी होने की खबर सामने आई। इसके बाद बिरना गांव में बंद मकान को निशाना बनाया गया। यहां चोर 1.60 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की जानकारी भी सामने आई थी।

3 अक्टूबर को आवाजापुर गांव में चोरों ने एक परिवार को निशाना बनाया। पीड़ित परिवार के अनुसार, चोरों ने नशीले पदार्थ का स्प्रे कर परिजनों को अचेत किया और करीब दस लाख रुपये के आभूषण तथा नकदी लेकर फरार हो गए। घटना की जांच के लिए पुलिस डॉग स्क्वाड के साथ मौके पर पहुंची थी। इसी खबर में धानापुर कस्बा स्थित हनुमान मंदिर से आधा किलो चांदी का मुकुट चोरी होने का भी उल्लेख किया गया था।

6 अक्टूबर को नरौली नई बस्ती में बंद मकान से 25 हजार रुपये नकद और करीब ढाई लाख रुपये के आभूषण चोरी होने की खबर आई। इसे गांव में चोरी की चौथी घटना बताया गया था।

13-14 अक्टूबर को धानापुर मुख्य बाजार में स्वर्गीय जितेंद्र सेठ के मकान को चोरों ने निशाना बनाया। छत के रास्ते घर में घुसे चोर दो लाख रुपये नकद और लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए। इस घटना के बाद भी स्थानीय लोगों ने लगातार हो रही चोरी पर नाराजगी जताई थी।

अब नवंबर की शुरुआत में काली माता मंदिर से चांदी का मुकुट और आंखें चोरी होने की घटना ने एक बार फिर पुलिस की चुनौती बढ़ा दी है।

पुलिस की गश्त पर सवाल, पुराने मामलों का क्या हुआ?

लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पुलिस की रात्रिकालीन गश्त, मुखबिर तंत्र और अपराध नियंत्रण की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर चोरी के बाद जांच का भरोसा दिया जाता है, लेकिन वारदातों का सिलसिला थम नहीं रहा। लोगों ने पुराने चोरी के मामलों में वांछित आरोपियों से पूछताछ करने और क्षेत्र में सक्रिय संदिग्धों की गतिविधियों की जांच करने की मांग उठाई है।

लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस को केवल घटनास्थल का निरीक्षण करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पुराने मामलों की कड़ियां जोड़कर चोरों तक पहुंचना होगा। आखिर कब तक चोर घरों और मंदिरों को निशाना बनाते रहेंगे और पुलिस हर घटना के बाद जांच का आश्वासन देती रहेगी?

अब पुलिस के सामने ये सवाल

  • कई महीनों से हो रही चोरी की घटनाओं का अब तक कितना खुलासा हुआ?
  • मंदिरों से चोरी गए मुकुट, घंटे और अन्य सामान की बरामदगी कहां तक पहुंची?
  • सीसीटीवी फुटेज में सामने आए संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी हुई या नहीं?
  • रात्रिकालीन गश्त और संदिग्धों की निगरानी कितनी प्रभावी है?
  • आखिर कब क्षेत्रवासियों को चोरी के आतंक से निजात मिलेगी?