सकलडीहा पीजी कॉलेज में ‘नारी वंदन’ की धूम

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छात्राओं के पोस्टरों ने बिखेरी रंगीन क्रांतिकारी छटा
चन्दौली के सकलडीहा पीजी कॉलेज में ‘नारी वंदन कार्यक्रम’ के तहत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता ने छात्राओं की अनकही रचनात्मकता को नई उड़ान दी। यह आयोजन न केवल कैनवास पर रंगों की बहार लाया, बल्कि नारी सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्राओं की गहरी संवेदनशीलता को भी उजागर किया। सैकड़ों छात्राओं ने उत्साह से भरे हाथों से पोस्टर बनाए, जो महज चित्र नहीं, बल्कि समाज सुधार की चिंगारियां साबित हुए।

छात्राओं की कलम-कूची से उभरे सशक्त संदेश
प्रतियोगिता में छात्राओं ने ‘नारी वंदन’ की थीम को जीवंत रूप दिया। उनके पोस्टरों में महिला अधिकारों की मांग तेजस्वी नारों से गूंजी, तो शिक्षा की ताकत को उकेरा गया चमकदार सितारों के रूप में। आत्मनिर्भरता को दर्शाते हुए एक पोस्टर में उड़ान भरती हुई महिला की आकृति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ लाल रंग की चेतावनी ने सबको झकझोर दिया।समान अवसरों पर आधारित पोस्टरों में पुरुष-महिला हाथ मिलाते दिखे, जो लैंगिक समानता का प्रतीक बने। इन रचनाओं ने साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी नारी सम्मान के लिए कितनी जागरूक और सृजनशील है।
प्राचार्य का प्रेरक संदेश और शिक्षकों का साथ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, “नारी वंदन महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। ऐसे कार्यक्रम समाज की पुरानी सोच को तोड़ने वाले हथियार हैं।” उन्होंने छात्राओं की रचनात्मकता की खुलकर तारीफ की और जोर देकर कहा कि ये प्रयास सामाजिक परिवर्तन की नींव रखेंगे।
इस अवसर पर प्रोफेसर उदय शंकर झा, प्रोफेसर दयाशंकर सिंह यादव, डॉ. रजनीश गुप्ता, डॉ. श्रीमती मीनू श्रीवास्तव, डॉ. वंदना कुमारी, श्रीमती सविता कुमारी और बृजेश यादव जैसे प्रमुख प्राध्यापक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
पुरस्कार वितरण के साथ शानदार समापन
प्रतियोगिता का समापन उत्कृष्ट पोस्टर बनाने वाली छात्राओं को सम्मानित करने के साथ हुआ। विजेताओं के चेहरों पर चमकती मुस्कान ने कार्यक्रम की सफलता की कहानी बयां कर दी। धन्यवाद ज्ञापन के बीच समापन हुआ, लेकिन ‘नारी वंदन’ का संदेश कैंपस से आगे समाज तक फैल गया। यह आयोजन साबित करता है कि शिक्षा संस्थान नारी उत्थान के मजबूत मंच बन सकते हैं।

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