सकलडीहा के मठ उछालगिरी में दिन-दहाड़े जेसीबी से अवैध खनन

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ग्रामीणों में रोष, प्रशासन पर निष्क्रियता के आरोप

चंदौली के सकलडीहा तहसील के मठ उछालगिरी गांव में शनिवार को दिन-दहाड़े जेसीबी मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध खनन किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनन से आसपास की कृषि योग्य जमीन, जलस्तर और ग्रामीण मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जबकि प्रशासन की निगरानी नगण्य है।



स्थानीय निवासी बताते हैं कि सुबह से शाम तक जेसीबी आती‑जाती रहती हैं और खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे खोदे जा रहे हैं। खनन स्थल की मिट्टी ट्रैक्टरों में भरकर पास के मार्गों से निकाल ली जा रही है। खनन की आवाज‑शोर व धूल के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन बाधित है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उपजाऊ मिट्टी व पानी की निचली परतें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे फसल प्रभावित होने का भय है। उन्होंने कहा कि खनन कार्य रात में भी जारी रहता है और इलाके में ध्वनि व धूल प्रदूषण बढ़ा है।




स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि बिना अनुमति और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) के खनन से भूमि कटाव, भू‑स्खलन तथा जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। खुले गड्ढे बच्चों व पशुओं के लिए गंभीर खतरे बन चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मानसून में जलभराव व बहाव बदलने से रास्तों व खेतों में बाढ़ का जोखिम भी बढ़ जाएगा।

आर्थिक व बुनियादी ढाँचे को नुकसान
किसानों ने चेतावनी दी है कि खेतों की उपज घटने और मिट्टी की गुणवत्ता बिगड़ने से उनकी आय प्रभावित हो सकती है। लगातार ट्रैक्टर व जेसीबी चलने से ग्रामीण मार्गों की स्थिति खराब हो रही है, जिससे स्थानीय यातायात व माल–परिवहन बाधित हो रहा है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि खनन के कारण खेतों के किनारे धंसी हुईं दीवारें और रास्तों में गहरे गड्ढे बन गए हैं।

धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन तथा उपजिलाधिकारी (सकलडीहा) कुंदन राज कपूर से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया; के सहयोगियों ने फोन उठाया पर वार्ता नहीं कराई। मामले की कई सूचनाएँ प्रकाश में आने के बावजूद अभी तक किसी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 

ग्रामीणों ने तुरंत खनन रोकने, प्रभावित जमीन की स्थिति की स्वतंत्र जाँच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जमीन की सीमाओं की पुख्ता पहचान, अनुमति‑रिकॉर्ड की जाँच और क्षेत्र में स्थायी निगरानी की भी अपील की। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर प्रशासन ने त्वरित कदम नहीं उठाए तो वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे तथा स्थिति ने विकराल रही तो न्यायालय का सहारा लेने पर मजबूर होंगे।

स्थानीय ग्रामीण और किसान संगठनों ने प्रशासन से शीघ्रतापूर्वक मौके पर स्थायी निगरानी टीम तैनात करने, जेसीबी व अन्य उपकरणों की निशानदेही करने और क्षतिग्रस्त जमीन की मरम्मत के लिए मुआवज़ा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई और मौके पर हुए निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या त्वरित रोकथाम व कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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