बाबा साहब डॉ. अंबेडकर: युगपुरुष, समानता के प्रणेता-रामचंद्र राम

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भव्य जुलूस में मोटर सायकिलों का तांता ,20 गावों तक भ्रमण कर बांटा संदेश 

14 अप्रैल भारत का स्वर्णिम दिवस: यह दिन न केवल उनके जन्म का उत्सव है, बल्कि उस क्रांतिकारी दर्शन का जश्न है जिसने शोषित समाज को समानता, शिक्षा और सम्मान का मार्ग दिखाया। रामचंद्र राम द्वारा ‘युग पुरुष’ कहे गए अंबेडकर ने छुआछूत की बेड़ियों को तोड़कर संविधान के माध्यम से भारत को नई पहचान दी।



संविधान निर्माण: विविधता में एकता का आधार
डॉ. अंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने और 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिनों की अथक मेहनत से दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान तैयार किया। इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां हैं, जहां उन्होंने 2,473 संशोधनों पर विचार किया। अनुच्छेद 14 से 18 ने हर नागरिक को कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित की, जो स्वतंत्र भारत की नींव बना।

महिलाओं के अधिकार: हिंदू कोड बिल की दूरदृष्टि
महिलाओं के उत्थान के कट्टर समर्थक अंबेडकर ने 1940-50 के दशक में हिंदू कोड बिल प्रस्तुत कर संपत्ति, विवाह, तलाक और गोद लेने के अधिकार दिए। नेहरू सरकार में कानून मंत्री रहते इसका विरोध झेला, लेकिन बाद में संपत्ति अधिकार लागू हुए। उनकी प्रेरणा से आज महिलाएं आईएएस, स्टार्टअप्स और राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।


शोषितों का मंत्र: शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो
अंबेडकर का अमर सूत्री “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” वंचितों की जागृति का प्रतीक है। 1927 के महाड़ सत्याग्रह में उन्होंने दलितों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का अधिकार दिलाया। 1932 के पूना पैक्ट से आरक्षण सुनिश्चित किया और 1956 में नागपुर में लाखों अनुयायियों समेत बौद्ध धर्म अपनाकर जातिवाद पर प्रहार किया।

विश्व स्तरीय विद्वान: अर्थशास्त्र से कानून तक
अंबेडकर की विद्वता अतुलनीय थी – कोलंबिया से अर्थशास्त्र में एमए (1915) व पीएचडी (1917), लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डीएससी, तथा ग्रेज इन से बैरिस्टर। उनकी थीसिस “प्रांतीय भारत में रुपए का विकास” अर्थशास्त्र का आधार बनी, जबकि ‘कास्ट्स इन इंडिया’ ने जाति व्यवस्था का पहला वैज्ञानिक विश्लेषण किया। वे पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेश में अर्थशास्त्र पर पीएचडी प्राप्त की।

प्रेरणा का स्रोत: रामचंद्र राम का भव्य जुलूस
चंदौली जनपद के सुदूर वनांचल नौगढ़ के हसीन वादियों और घुंघराले जंगलों के बीच भीम आर्मी जिलाध्यक्ष रामचंद्र राम के नेतृत्व में आयोजित पांच सौ मोटरसाइकिलों का जुलूस बीस गांवों तक भ्रमण कर जय भीम, जय भारत। बाबा साहब अमर रहें। के नारों व अंबेडकर के विचारों का प्रचार करता रहा है। यह जुलूस न केवल श्रद्धा दिखाया है, बल्कि समानता के संदेश को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाया है। बाबा साहब का सफर छुआछूत झेलने वाले बालक से संविधान निर्माता तक हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

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