भारतीय संविधान का मूल भाव है मानवता-अर्जुन आर्या

लखनऊ,13 सितंबर 2024 शुक्रवार। भारतीय संविधान मानवता बेहतर का स्वप्न और सर्वे भवंतु सुखिना का दस्तावेज है।जिसमें एक ऐसी मानवता है जो मनुष्य ही नहीं संपूर्ण प्राणी जगत के कल्याण की भावना व्याप्त है। भारत का संविधान केवल राजनीतिक दस्तावेज ही नहीं है, वरन यह भारतीयता की सामाजिक, सांस्कृतिक रचना भी है। हम नागरिकों का कर्तव्य है कि भारतीय संविधान की मानवता के आदर्शों काे लेकर साकार करने के लिए हर संभव प्रयास करें। यह बात उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली के चहनियां ब्लॉक अन्तर्गत लक्ष्मणगढ में स्थित चकेश्वरी इंटर कॉलेज के सभागार हाल में लॉर्ड बुद्धा डॉ.अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन प्रसाद आर्या ने संगठन की आयोजित एक गोष्ठी के सम्बोधन में कहा।
भारतीय संविधान ही मानवता का द्योतक है विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में अध्यक्षता कर रहे आनन्द प्रकाश मौर्य ने कहा कि हमारा संविधान भारतीय जन-जीवन का एक ऐसा महाकाव्य जिसके स्रोत उसके नगारिक हैं।संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्ति की जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकार या भारत में अदालतों में अंतर्राष्ट्रीय वाचाएं और प्रवर्तनीय संरक्षित है जो अंततः राष्ट्रीय विकास को एक पूरक के रूप में ले जाता है।
भारत का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को बुनियादी मानवाधिकारों की गारंटी देता है। संविधान के मर्मज्ञों ने आवश्यक प्रावधानों को पूरा करने में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है। हालांकि, निरंतर विकास के साथ, मानव अधिकारों के क्षितिज का भी विस्तार हुआ है। यह बुद्ध के सिद्धांतों मे निहित माना और पहचाना भी जाता है।
वहीं विशिष्ठ अतिथि राजनाथ राम,रामलाल मौर्य, विनोद कुमार, जयराम शास्त्री ने कहा कि संविधान की मानवता मनुष्य की गरिमा और राष्ट्र की गरिमा को सुनिश्चित करती है। संविधान ने मानवता का वाचन किया है। कार्यक्रम का संचालन कन्हैया राम भारती ने किया। आभार सीहोर पासवान ने माना। गोष्ठी में अजय कुमार, महेंद्र, पतियार राम, हरिनाथ कुशवाहा, अनिल कुमार, नारायण कुशवाहा, संतोष कुशवाहा, विजयानंद, रिंकू, रामअवतार सहित अन्य ने संबल प्रदान किया।
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