पूर्व मंत्री व थानाध्यक्ष समेत 7 लोग तलब

कोर्ट की अवमानना का आरोप, जानें क्या था पूरा मामला
वाराणसी। सिविल जज जूनियर डिवीज़न (द्वितीय) शक्ति सिंह की अदालत ने मिर्जापुर जनपद के चौक त्रिमुहानी निवासी पूर्व मंत्री कैलाश नाथ चौरसिया, उनकी पत्नी जानकी देवी, सीमा देवी, के साथ लक्ष्मी देवी, भतीजे शुभम चौरसिया, रितिक चौरसिया के अलावा थानाध्यक्ष लक्सा को न्यायालय के अवहेलना- अवमानना के मामले में तलब किया गया है। अदालत में अगली सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तिथि तय की है। अदालत में वादी प्रदीप चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक कुमार दुबे ने पक्ष रखा।
त्रिमुहानी चौक, महुअरिया, मिर्ज़ापुर निवासी वादी प्रदीप चौरसिया के मुताबिक़ उसका रामपुरा, थाना लक्सा रोड पर होटल ओके है को जरिये पंजीकृत लीज डीड 19 दिसम्बर 2023 को पट्टाकर्ता कैलाशनाथ, जानकी देवी, सीमा देवी व लक्ष्मी देवी जरिये मुख्तारेआम ओमप्रकाश चौरसिया से प्राप्त किया है.
उक्त लीज 19 दिसम्बर 2023 को उपनिबंधक प्रथम, वाराणसी के यहाँ पंजीकृत है। उक्त लीज के निष्पादन के बाद प्रार्थी पट्टाशुदा सम्पत्ति पर आबाद चला आ रहा है तथा उपयोग उपभोग कर रहा है, परन्तु प्रतिवादीगण आये दिन मारपीट व जबरिया गाली-गलौज पर आमादा रहते थे, जिस कारण वादी ने सिविल जज (जू०डि०) तृतीय, वाराणसी में वाद प्रदीप चौरसिया बनाम कैलाशनाथ वगैरह दाखिल किया था.
न्यायालय द्वारा उपरोक्त वाद में सम्पूर्ण भवन को यथास्थिति कायम रखने का आदेश 09 अप्रैल 2024 पारित किया गया है, जिसमें न्यायालय द्वारा प्रतिवादीगण को आदेशित किया गया है कि “मुकदमें के निस्तारण तक प्रतिवादी नं0 1 ता 4 वादग्रस्त सम्पत्ति अर्थात् किरायेदारी वाले भवन, जिसका विवरण वादपत्र के अंत में अंकित है, पर से वादी को विधि-विरूद्ध व जबरदस्ती बेदखल न करें और न ही उसके उपयोग उपभोग एवं व्यवसाय में किसी प्रकार का कोई व्यवधान उत्पन्न करें”
उक्त आदेश वर्तमान समय में भी प्रभावी है. न्यायालय के आदेश 09 अप्रैल 2024 के पश्चात् प्रतिवादीगण हाजिर अदालत आ गये हैं. प्रतिवादीगण न्यायालय के द्वारा पारित आदेश 9 अप्रैल 2024 को मानने से इनकार कर रहे हैं और विवादित सम्पत्ति पर प्रार्थी के उपयोग उपभोग एवं व्यवसाय में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं तथा प्रार्थी व प्रार्थी के कर्मचारियों को मारपीट कर जबरिया भगा रहे हैं व प्रार्थी के साथ मारपीट व गाली-गलौज करते रहते हैं.
प्रार्थी थाने दौड़ता रहता है, मगर पुलिस द्वारा साजिश में शामिल होकर उपरोक्त जायदाद पर तोड़-फोड़ व रद्दोबदल पर आमादा है. चूंकि प्रतिवादी कैलाशनाथ चौरसिया पूर्व सपा विधायक व मंत्री रह चुके हैं, जिनकी पहुँच उपर तक है व रसूखदार व्यक्त्ति हैं, जिसकी वजह से थाना इलाका की पुलिस भी इनकी साजिश में शामिल है.
विपक्षीगण द्वारा विवादित स्थल पर निषेधाज्ञा आदेश प्रभावी रहने के बावजूद बराबर कब्ज़ा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि न्यायालय के आदेश 09 अप्रैल 2024 की अवहेलना है, जिसके आधार पर विपक्षीगण न्यायालय के अवमानना के दोषी है. ऐसी स्थिति में विपक्षीगण को न्यायालय में आहूत कर उसके द्वारा न्यायालय के आदेश 09 अप्रैल 2024 की अवहेलना व अवमानना के लिये उन्हें उचित धाराओं में कारावास में निरूद्ध करके दण्डित किया जाना आवश्यक एवं न्यायसंगत है.