राम कथा में अनगिनत कथा प्रेमियों ने ज्ञान का किया रसास्वादन

रामलला की श्यामल मनोहर छवि का हुआ सचित्र चित्रण, शिक्षा और संस्कार के लिए गुरुकुल में जाना अनिवार्य
चंदौली, राम जानकी शिव मठ मंदिर मे मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति द्वारा हो रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवे दिन गुरुवार को कथावाचको ने रामलला की श्यामल मनोहर छवि का सचित्र वर्णन कराते हुए अनगिनत कथा प्रेमियों की खुशी के अश्रुओ से आंखे नम कर दिया.
कथावचक श्यामबिहारी मिश्रा ने जटायु वध का वर्णन करते हुए कहा कि नारी की मर्यादा को बचाने के लिए जिस देश का पक्षी अपने प्राणों की आहुति कर दिया वह देश कितना महान है और वहां के मानव कितने चरित्रवान होंगे, जबकि आज के परिवेश में महिलाओ का मार्ग मे चलना दुर्लभ हों गया है. अर्थात् नारियों के सम्मान में ही देश की महानता है.
संत चंद्रबली दास ने रामलला की शिक्षा और संस्कार पर विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि
संतो का संस्कार पाने के लिए गुरु कुल में जाना अनिवार्य है.
साध्वी अन्नपूर्णा (पीठाधीश्वर मध्य प्रदेश) ने भरत चरित्र का सचित्रण करते हुए कहा कि राम के सबसे प्रिय भरत जी थे. भरत ने श्रीराम जी की चरण पादुका सिंहासन पर रखकर स्वयं पृथ्वी पर गड्ढा खोदकर नीचे बैठते थे, संस्कार सीखने का मानस में कहीं जगह है तो वह भरत चरित्र में ही निहित है.
डॉ. सुधा पाण्डेय ने राम वन गमन पर लंबी रेखा खींची. जिसका कथा प्रेमियों ने हुलसित मन से रसास्वादन किया. लक्ष्मण रेखा को अंदर रावण इसलिए नहीं प्रवेश किया कि वह चरित्रहीन और अभिमानी था, जबकि रेखा एक चरित्रवान एवं वैरागी द्वारा खींची गई थी.
मंच का संचालन करते हुए आचार्य उदय नारायण ‘ मयंक‘ ने सती पार्वती को यज्ञ कुंड में कूदने का वर्णन करते हुए कहा कि पार्वती जी को भगवान के प्रति कुतर्क करने के कारण ही उन्हें यज्ञ कुंड में आहूति देनी पड़ी. अतः भगवान के प्रति तर्क कुतर्क नही करना चाहिए. अन्यथा पार्वती जैसा ही हस्र होगा.
प्रवचन के दौरान मुख्य जजमान जयशंकर द्विवेदी, संयोजक हरिद्वार सिंह, अध्यक्ष डॉ. संतोष तिवारी, कोषाध्यक्ष शिवबच्चन सिंह, मंत्री हरेंद्र प्रताप सिंह, दिनेश तिवारी, पंकज तिवारी, महमंत्री राजनरायण विश्वकर्मा, नंद किशोर पाण्डेय, कमला देवी, गीता सिंह, नीतू सिंह, अंशू की मां, त्रिवेणी देवी, रीता देवी, कलावती, उपस्थित रहे.