मजदूर दिवस पर नजरबंदी: संवैधानिक अधिकारों पर हमला-अजय राय

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चकिया, चंदौली। खबर यूपी के चंदौली जिले के चकिया विकास खंड से है, जहां आज अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर एआईपीएफ के राष्ट्रीय फ्रंट कमेटी सदस्य अजय राय को पुलिस ने घर में नजरबंद कर दिया। हृदयाघात के बाद पेसमेकर लगे होने के बावजूद दवा लेने गांधी पार्क जाने के प्रयास में उन्हें रोका गया। एसएचओ ने मानवीय आधार पर दवा की अनुमति दी, लेकिन घर लौटते ही नजरबंदी लागू कर दी गई।

फोटो ;अजय राय को पुलिस द्वारा नजरबंद 

मोदी नीतियों पर अजय राय का तीखा प्रहार
अजय राय ने मजदूरों की दयनीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई। अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजदूर आज शोषण, बेरोजगारी और असुरक्षा से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्मानजनक वेतन, सुरक्षित कामकाजी माहौल और सामाजिक सुरक्षा ही मई दिवस का वास्तविक स्वरूप है, जो आज नदारद है। केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों को मजदूर-विरोधी बताते हुए राय ने न्यूनतम मजदूरी के उल्लंघन, ठेका प्रथा के बढ़ते शोषण और सरकारी नौकरियों के सिमटने का आरोप लगाया।
श्रम कानूनों पर सवाल, एकजुटता का आह्वान
श्रम कानूनों में बदलावों को राय ने मजदूर अधिकारों पर प्रहार बताया। सभी श्रमिकों के लिए पंजीकरण, स्वास्थ्य सुविधा, बीमा और पेंशन की मांग उठाई। नोएडा आंदोलन को “आधुनिक गुलामी के खिलाफ विद्रोह” करार देते हुए उन्होंने श्रमिकों से जागरूकता और संगठित संघर्ष की अपील की। मई दिवस पर नेताओं की नजरबंदी और जुलूस पर रोक को संवैधानिक अधिकारों का हनन कहा।
मजदूर किसान मंच का विरोध: सरकार डरी हुई।
मजदूर किसान मंच ने इसे असंवैधानिक दमन करार दिया। संगठन का कहना है कि सरकार मजदूर आंदोलन से भयभीत है। शांतिपूर्ण विरोध और एकजुटता के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की गई। यह घटना मजदूर आंदोलन को दबाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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