आंधी की मार से खेतों में पसरा सोना: पिंटू पाल

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चंदौली में गेहूं की फसलें जमीन पर बिछी, किसानों पर आर्थिक संकट, सरकार से मुआवजा की मांग

चंदौली। जनपद के सकलडीहा, सदर, मुगलसराय, चकिया सहित नौगढ़ तहसील क्षेत्रों में बुधवार को अचानक तेज आंधी और तूफान ने गेहूं की पकी फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। कुछ ही दिनों में खलिहान सजाने वाली यह ‘सोने’ जैसी फसल अब खेतों में ही बिछी नजर आ रही है। हल्की बारिश के साथ 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली आंधी ने हजारों एकड़ क्षेत्र में कहर बरपाया। इससे किसानों की उम्मीदें चूर-चूर हो गईं। जिला कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, कम से कम 5,000 हेक्टेयर से अधिक गेहूं फसल प्रभावित हुई है।



किसानों के मुताबिक, पौधे पूरी तरह झुक चुके हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक गई है और दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई। सकलडीहा तहसील क्षेत्र के किसान शेषनाथ यादव, दीनानाथ श्रीवास्तव, विजयकांत पासवान गुड्डू, मुन्ना सिंह, धनंजय यादव, मोहन यादव ने बताया, “हमारी फसल कटाई के ठीक दो दिन पहले तैयार थी। आंधी ने सब उजाड़ दिया। अब दाने गिर रहे हैं, कटाई करने पर भी आधा ही बचेगा। एक एकड़ से 20 क्विंटल की उम्मीद थी, अब 8-10 से ज्यादा नहीं मिलेगा।” इसी तरह, चकिया की किसान महिला सुनीता देवी बोलीं, “पति की बीमारी के बीच यह फसल हमारा सहारा थी। अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा।”

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर बुरा असर पड़ता है। बनारस कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अजय सिंह ने कहा, “आंधी से पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और हवा का दबाव दानों को सिकुड़ने पर मजबूर कर देता है। उत्पादन में 40-60% तक गिरावट तय है। कटाई में देरी करने पर फफूंद का खतरा भी बढ़ेगा।” उन्होंने सलाह दी कि प्रभावित किसान तुरंत कटाई करें और बीमा दावा फाइल करें।

गेहूं इन किसानों की मुख्य आजीविका है। इस नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। खेतों में गिरी फसल काटना भी अब मुश्किल है, जिससे श्रम लागत 30-40% बढ़ जाएगी और उपज घटेगी। कई किसानों ने बताया कि बाजार भाव अच्छा होने पर भी यह नुकसान साल भर का खर्चा पूरा नहीं कर पाएगा। मौसम विभाग ने शुक्रवार को चेतावनी जारी की थी, लेकिन किसानों को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी।

किसान नेता पिंटू पाल ने सरकार से नुकसान का तुरंत सर्वे कराने और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी से मौके पर निरीक्षण कर राहत प्रदान करने का आग्रह किया। एक किसान संगठन के पदाधिकारी ने कहा, “पिछले साल भी बाढ़ में वादे हुए, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। इस बार ड्रोन सर्वे और तत्काल मदद चाहिए।” जिला प्रशासन ने शनिवार को सर्वे टीम गठित करने की घोषणा की है, लेकिन किसान चिंतित हैं कि देरी से राहत प्रभावी नहीं होगी। यह विपदा न केवल चंदौली, बल्कि आसपास के जिलों के किसानों के लिए सबक है—जलवायु परिवर्तन से फसलों पर बढ़ते खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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