मिर्जापुर में बाण सागर नहर परियोजना घोटाला

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एंटी-करप्शन ने JE मुसाफिर सिंह को 1 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

मिर्जापुर, 25 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में बाण सागर नहर परियोजना पर भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के जूनियर इंजीनियर (JE) मुसाफिर सिंह यादव को उत्तर प्रदेश एंटी-करप्शन संगठन (UPAC) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।यह घटना ठेकेदार के बिल पास कराने के नाम पर हुई, जो परियोजना में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें दर्शाती है। 


फोटो: जेई मुसाफिर यादव 


मामले का पूरा विवरण
प्रयागराज के करछना निवासी ठेकेदार मिथिलेश (या प्रतिनिधि दीपक) को बाण सागर नहर के निर्माण के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये का ठेका मिला था। नवंबर 2025 तक 3 करोड़ का काम पूरा हो चुका था, लेकिन शेष कार्य पास करने के लिए चंदौली जिले के सकलडीहा क्षेत्र के नई बाजार निवासी JE मुसाफिर सिंह यादव ने 2 लाख रुपये रिश्वत की मांग की, जो 1 लाख पर सेटल हुई। ठेकेदार की शिकायत पर UPAC ने सखौरा बाण सागर कॉलोनी में जाल बिछाया और गिरफ्तारी की। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत देहात कोतवाली में केस दर्ज हुआ।




भ्रष्टाचार का संदर्भ
उत्तर प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं में जूनियर इंजीनियरों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले आम हैं। 2025 में 150 से अधिक JE सस्पेंड हो चुके हैं। इस मामले में JE के पिछले रिश्वत संग्रह की जांच चल रही है। UPAC प्रभारी अनिल कुमार चौरसिया ने पुष्टि की कि पूछताछ जारी है।PWD ने प्रोजेक्ट की ऑडिट शुरू की है। बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की जांच होगी। यह घटना यूपी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करती है, लेकिन सिंचाई विभाग में पारदर्शिता पर सवाल बने रहेंगे।

बाण सागर नहर परियोजना: यह भारत की सबसे बड़ी नहर परियोजनाओं में से एक है, जो मध्य प्रदेश से यूपी तक 689 किमी लंबी है। इसका निर्माण 1978 से चल रहा है और इससे 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है—लेकिन भ्रष्टाचार से किसानों को नुकसान हो रहा है।यह गिरफ्तारी बाण सागर नहर परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, जो किसानों के लिए जीवनरेखा है।

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