अम्बेडकरनगर के खैरपुर में विकास कार्यों की शिकायत के निस्तारण पर सवाल

खैरपुर में विकास कार्यों की कथित अनियमितता की शिकायत से ज्यादा अब उसके निस्तारण की प्रक्रिया सवालों में है। सीएससी भवन समेत संबंधित कार्यों का स्थलीय सत्यापन और अभिलेखों की जांच ही तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है और आईजीआरएस निस्तारण कितना पारदर्शी था।

अम्बेडकरनगर। टांडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत खैरपुर में पांच वर्षों के विकास कार्यों में कथित अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और सीएससी भवन, आरआरसी सेंटर व हैंडपंप कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत के बाद आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40017826036150 का 4 अक्टूबर को निस्तारण किए जाने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना मौके पर निष्पक्ष भौतिक सत्यापन किए शिकायत का निस्तारण कर दिया गया, जबकि सीएससी भवन में शिकायत के बाद दरवाजा, खिड़की और फर्श का काम कराए जाने का भी दावा किया गया है।

ग्राम पंचायत खैरपुर के अंशु वर्मा, मनदीप गौड़, संतोष पाल, करन, संदीप कुमार, अजय कुमार, राहुल, तूफान समेत दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी ईशा प्रिया के समक्ष ऑनलाइन/मुख्यमंत्री पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पिछले पांच वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की जांच की मांग करते हुए कॉमन सर्विस सेंटर भवन, आरआरसी सेंटर, हैंडपंप रिबोर व मरम्मत समेत अन्य कार्यों में कथित वित्तीय एवं निर्माण संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

बिना मौके की जांच निस्तारण का आरोप

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें जांच की कोई सूचना नहीं दी गई और न ही उनके सामने संबंधित कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराया गया। उनका सवाल है कि यदि मौके पर जांच नहीं हुई तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता किस आधार पर परखी गई।

ग्रामीणों ने आईजीआरएस निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

सीएससी भवन बना जांच का अहम बिंदु

ग्रामीणों के अनुसार सीएससी भवन को वर्ष 2022-23 में संचालित दिखाया गया, जबकि उस समय भवन अधूरा होने का दावा किया जा रहा है। शिकायत के बाद भवन में दरवाजा, खिड़की, फर्श समेत अन्य कार्य कराए जाने की बात भी सामने आई है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भवन पहले से पूर्ण था तो बाद में ये कार्य क्यों कराए गए। वहीं यदि शिकायत गलत है तो मौके के भौतिक सत्यापन से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

जांच प्रक्रिया पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने जांच से जुड़े जेई राजबहादुर पाल तथा अशोक गुप्ता/टीए की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि स्थलीय सत्यापन नहीं हुआ तो जांच रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई और उसी के आधार पर आईजीआरएस का निस्तारण कैसे हुआ।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

अब ब्लॉक स्तर से जांच की बात

ब्लॉक स्तर से मिली जानकारी के अनुसार एडीओ पंचायत सहायक ने मामले की पूरी जानकारी होने से अनभिज्ञता जताते हुए ग्राम पंचायत खैरपुर के विकास कार्यों की जांच कराने की बात कही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

यही स्थिति पूर्व में किए गए आईजीआरएस निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़ा करती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब विकास कार्यों की जांच आवश्यक है तो पहले शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच के लिए सरकारी अभिलेखों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और प्रत्येक संबंधित निर्माण कार्य के स्थलीय सत्यापन की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या निराधार।

यदि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो ग्रामीणों ने मामले को उच्च स्तर पर ले जाने की बात कही है।

ग्राम प्रधान, ग्राम्य विकास अधिकारी घनश्याम चौधरी और संबंधित अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले में अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।