BHU के पूर्व विभागाध्यक्ष से 42 लाख 70 हजार रूपये का हुआ साईबर फ्रॉड, मुकदमा दर्ज

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मुनाफे के नाम पर सुनियोजित धोखाधड़ी एवं साइबर वित्तीय अपराध करने वाले ने अनेको व्यक्तियों को ठगा गया है।

वाराणसी। मुनाफ़े के नाम पर 42 लाख 70 हजार रूपया का फर्जीवाड़ा व साईबर अपराध के मामले में शुक्रवार को साइबर थाने में अज्ञात के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज किया गया है। गौतम नगर कालोनी, सुसुवाही, थाना चितईपुर निवासी डॉ उदय प्रताप शाही ने अपने अधिवक्ता संजीव वर्मा के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को तहरीर दी थी, जिसके बाद साइबर क्राइम थाने में धोखाधड़ी, साइबर क्राइम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। 


प्रकरण के मुताबिक डॉ उदय प्रताप शाही पिछले वर्ष 2023 में सर सुन्दरलाल चिकित्सालय (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के पूर्व विभागाध्यक्ष, कैंसर आकोलाजी डिपार्टमेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। आरोप है कि 8 मार्च 2024 को उनको एक मनीसुख स्टॉक स्टडी ग्रुप में शामिल किया गया था। 13 अप्रैल 2024 को शेयर मार्केट से जोड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए वह इस ग्रुप से जुड़ गये। 

आदिती सिंह जिनका व्हाट्सएप नंबर व टेलीग्राम आईडी इस ग्रुप की नामित सहायक थी। वह इस ग्रुप के सभी सदस्यों से जुड़ी हुई थी व वीरेन्द्र मनसुखानी इसके मुख्य शिक्षक थे, जिन्हें ग्रुप में लोग प्रोफेसर कह कर बुलाते थे उनके द्वारा मार्केट की स्थिति देखकर स्टॉक में निवेश करने की अनुशंसा करते थे। वीरेंद्र मानसुखनानी की सलाह लेकर ग्रुप के कई सदस्यों द्वारा अत्यधिक लाभ कमाने की बात स्वीकारी व बधाइयां और धन्यवाद देने का एक ऐसा माहौल बनाया गया जिससे वह प्रेरित होकर 12 जून 2024 को उक्त ग्रुप में बताए गए आईपीओ में निवेश करना चाहा, जिसमें 200 से 300 प्रतिशत तक लाभ कमाने की बात कही गई। 

तदोपरान्त अदिति सिंह के निर्देशन पर कस्टमर सर्विस मैनेजर के माध्यम से वह मनीसुख मास्टर एकाउंट unmchg in खोल तथा आईपीओ Le Travenues Tech के लिए अप्लाई किया, सिस्टम के अनुसार उसके द्वारा 74319 रुपए शेयर जीते गए। subscription विधि निवेशक पर निर्भर नहीं था। यह एक तरह का लाटरी सिस्टम था, जिससे सिस्टम स्वयं से किसी का भी चयन कर सकता था। 

इस बात की जानकारी उसे नहीं दी गई जिसका पता उसको बाद में चला। एक बार शेर मिलने पर उसे बदला नहीं जा सकता था उसे सब्सक्राइव करना आवश्यक था, उसे एक बार अपने साथ फ्रॉड होने की आशंका होने के बावजूद लालच में पड़कर वह उलझते गए व कस्टमर सर्विस के दिशा निर्देश पर निम्नलिखित बैंक अकाउंट में सांवरिया डीजे और साउंड एकाउंट नंबर आईएफएससी कोड में 50000 12 जून 2024 को व JAGDABA RESTAURANT CANRA BANK एकाउंट मे बत्तीस लाख बीस हजार बावन रुपया) ट्रांसफर किया। 

कुल (बत्तीस लाख सत्तर हजार बावन रूपये) ट्रांसफर किया। उसके द्वारा लिया गया IPO LE Travenves Tech का शेयर 18 जून 24 को लिस्ट हुआ तब वह LE Travenves Tech शेयर उन्ही के प्लेटफार्म पर बेच दिया और अपने पैसे वापस चाहे तब उनके द्वारा ₹10 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग इसलिए की गई जिससे इतना बड़ा एमाउंट ट्रांसफर किया जा सके।

तब उसने 28 जून 2024 को 10 लख रुपए इनके द्वारा बताए गए बैंक अकाउंट MG ENTERPRISES JANA BANK GUWAHATI द्वारा ट्रांसफर दस लाख रुपये जमा करने के बाद मुझे बताया गया कि मेरे अकाउंट पर एक और आईपीओ शेयर है DEE Develop Engineers के नाम से परंतु जिसके लिए उसके द्वारा न कभी अप्लाई किया गया न पैसे जमा किए गए लेकिन वह उनलोगों से अलर्ट हो गया। 

खैर उसने उन सभी शेयरों को बताए गए तरीके से बेचकर एकाउंट बंद कर दिया, तब उसको बताया गया कि वह मनसुख अकाउंट में कुल 2981967498 रुपए का बैलेंस है। एकाउंट बंद होने के पश्चात उसको ब्रोकरेज फीस के रूप में 14 लाख 90 हजार 9 सौ तीरासी रुपए 75 पैसे की मांग की गई। उक्त धनराशि देने के पश्चात ही आपका एकाउंट आपके बैंक एकाउंट में ट्रांसफर किया जाएगा।

 वह बार-बार अनुरोध किया कि यह ब्रोकरेज फीस मेरे मूल धनराशि से काटकर मुझे बाकी रकम लौटा दी जाए, लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया, अब उसको पूरा विश्वास हो गया था कि यह सारा क्रियाकलाप सुनियोजित धोखाधड़ी एवं साइबर वित्तीय अपराध का मामला है, जिसमें उसको व उसके जैसे अनेको व्यक्तियों को ठगा गया है।

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