चंदौली में भविष्य एकता शक्ति कार्यक्रम संपन्न

आगामी पंचायती राज चुनाव की रणनीति पर चर्चा, बहुजन विरोधी ताकतों को नष्ट करने पर बल, संतो महापुरुषों के संघर्षों से प्रेरणा लेकर हक और अधिकार लेने की रणनीति
चन्दौली। जनपद के सदर स्थित एक लॉन में भविष्य एकता शक्ति कार्यक्रम का आयोजन रविवार को सम्पन्न हुआ। जिसमे बहुजन समाज के चितको ने सामाजिक पहलुओं व पंचायती राज व्यवस्थाओं को लेकर चिंतन मंथन किया। साथ ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़ी जातियों तथा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को जोड़ कर एक बड़ा महासंघ बनाकर बहुजन विरोधी ताकतों के जमीन में जातीय अहंकार रुपी फूट के बीज को नष्ट करने पर बल दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बब्बन सिंह चौहान ने कहा कि बहुजन नेताओं की अदूरदर्शिता के घातक परिणाम का उदाहरण है नब्बे फीसदी जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित और आर्थिक सामाजिक राजनीतिक रूप से कमजोर होना। सदियों से चले आ रहे जातीय छुआछूत भेदभाव की खाई को मिटाकर ही एकता शक्ति दिखाई जा सकती है।
अर्जुन प्रसाद आर्या ने कहा कि तथागत बुद्ध के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए बहुजन वर्ग की पिछड़ी अति पिछड़ी और दलित अति दलित एवं अल्प संख्यक जातियों को समाज की दिशा देने, सामाजिक परिवर्तन लाने , एकता शक्ति की ताकतों को हाँ में हाँ मिलाना होगा। तभी हमारी सामाजिक राजनीति और आर्थिक जड़े मजबूत होंगी।आज भी बहुजन समाज आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन सत्ता, आय और अधिकार के स्थानों पर उनकी उपस्थिति नगण्य है। भारत के निर्माण में बहुजनों ने कृषि और कारीगरी के क्षेत्र में अपनी मेहनत से सबसे बड़ा योगदान दिया है; वे उत्पादक थे। उनके मुकाबले अन्य सभी जाति-समूहों का योगदान बहुत कम है। फिर भी दस फीसदी जनता नब्बे फीसदी पर हुकूमत कर रही है।
हाजी जोखू सिद्दीकी ने आगामी पंचायती राज व्यवस्थाओं पर आम ग्रामीण जनता(पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यको) की लोकतंत्र में प्रभावी भागीदारी का सशक्त माध्यम कैसे बनेगा, इस मार्ग को कैसे प्रशस्त किया जायेगा, प्रतिष्ठा, यश, शक्ति और अधिकार कैसे मिलेगा इसपर विस्तार से चर्चा किया। उन्होंने कहा कि अब हम सबको एक होकर पंचायत राज की नब्बे फीसदी सीट पर जीत हासिल करना है। जब हमारी एकता जिले में मजबूत बनेगी तो धीरे धीरे प्रदेश से लेकर देश में बहुजन का राज होगा।
तिलकधारी बिंद ने कहा कि आज बहुजन एकता चुनौती बन गई है। जिसका जीता जागता उदाहरण है अनेकों शताब्दियों तक सत्ता से दूर रहना एवं दस फीसदी के लोगों का सत्ता में बने रहना।
वहीं डॉ. संजय कनौजिया डॉ. सुनील मौर्या, रामनगीना बिंद, छविनाथ चौहान व आनंद प्रकाश मौर्य ने कहा कि बहुजन समाज में जन्में संतो महापुरुषों, ऋषियों मुनियों और बुद्धजीवियों के सार्वभौमिक विचारों का विश्लेषण करने और समझने के लिए प्रतिबद्ध होना होगा। हमारे पूर्वज जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रेरणा और प्रेरक भी हैं। उनका विजन और मिशन भारतीय समाज के दबे-कुचले और उत्पीड़ित वर्गों के उत्थान और बेहतरी के लिए मार्गदर्शक स्रोत हैं। उनके दिशा-निर्देशों और कार्यों ने लाखों बहुजनों को भेदभावपूर्ण जाति व्यवस्था की जंजीरों और गुलामी से उबरने के लिए प्रकाश डाला है। हमे उनके जीवन और संघर्षों से प्रेरणा लेनी होगी। तभी बहुजन समाज की एकता बनेगी और शक्ति मिलेगी। तब जाकर हम अपने हक और अधिकार पर हाबी होंगे।
एकता शक्ति कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी राधेश्याम मोहन बिंद, छविनाथ चौहान, अरुण मौर्य, सुनील मौर्य, जितेन्द्र मौर्य, बाबूजान, जिला पंचायत सदस्य गणेश प्रसाद, फूलचंद राम, रमेश राम ,रतीश राम, शिक्षक लल्लन कुमार,अरुण रत्नाकर, निठोहर सत्यार्थी, गिरिजेश कुमार दादा, अधिवक्ता अमरेश कुमार, रामाश्रय, बलवंत,पन्ना लाल रामलाल, मृत्युंजय कनौजिया, चेखुरी बनवासी, दुलारे कनौजिया सहित अन्य बहुजन चिंतकों ने संबल प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक शिक्षक त्रिलोकी नाथ गौतम ने उपस्थित सभी बहुजन चिंतको का अभिवादन और धन्यवाद ज्ञापन किया।