धान का आभासी कंडुआ रोग एक फफूंद जनित रोग है – स्नेह प्रभा

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धान के दाने में काले पाउडर टिलेशिया बार्कलेना के कारण होता है, बीज को फफूंद नाशक से उपचारित करें 
चन्दौली। कृषि रक्षा अधिकारी स्नेह प्रभा ने बताया कि धान का आभासी कंडुआ रोग एक फफूंद जनित रोग है। यह रोग धान की बालियों पर काले या पीले-हरे रंग के पाउडर जैसे ढेलों के रूप में दिखाई देता है, जिससे दाने पूरी तरह खराब हो जाते हैं। यह हवा और नमी के माध्यम से तेजी से फैलता है और अधिक नमी और ऊंचे तापमान वाले वातावरण में इसका प्रकोप बढ़ जाता है। यह फफूंद टिलेशिया बार्कलेना के कारण होता है।

इस रोग से बचने के लिए खेतों की गर्मी की गहरी जुताई अवश्य करना चाहिए।बीज का शोधन स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स/ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम/ किलो बीज की दर से बीज शोधन करना चाहिए या एक हेक्टाएर विचड़ो के लिए बिचड़ो को 100 लिटर पानी में 2.5 किलो स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स/ट्राइकोडर्मा की मात्रा मिलाकर बिचड़ो 30 मिनट तक रखे फिर रोपाई करनी चाहिए। उर्वरक के अत्याधिक उपयोग से बचना चाहिए। 

फसल चक्र अपनाना चाहिए। बाली निकालने की अवस्था में प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत एसी या पिकाक्सीस्त्रोम्बीन 7.05 प्रतिशत और प्रोपिकोनाजोल 11.7 प्रतिशत एससी की एक लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टेयर की दर से छिडकाव करना चाहिए।

 बीज को बोने से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करें। खेत में नमी को कम करने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था रखना चाहिए।

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