घुरहुपुर में गूंजा बुद्ध का शांति संदेश, बौद्ध महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब
घुरहुपुर बौद्ध महोत्सव ने बुद्ध के उस कालजयी संदेश को नई आवाज दी, जिसकी आज समाज को सबसे अधिक जरूरत है। नफरत के स्थान पर करुणा और हिंसा के स्थान पर अहिंसा को अपनाकर ही मानवता, सामाजिक एकता और विश्व शांति की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

हिंसा, नफरत और वैरभाव छोड़कर करुणा व मानवता के मार्ग पर चलें : अविनाश कुशवाहा
चकिया (चंदौली)। घुरहुपुर की ऐतिहासिक धरा पर भगवान तथागत गौतम बुद्ध के शांति, करुणा और मानवता के संदेश गूंज उठे। भव्य बौद्ध महोत्सव में बड़ी संख्या में भंते, श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। वक्ताओं ने बुद्ध के विचारों को जीवन में उतारने और समाज को हिंसा, नफरत व वैरभाव से मुक्त करने का संकल्प दिलाया।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण घुरहुपुर स्थित बुद्ध प्रतिमा एवं प्राचीन अभिलेखों के समीप बौद्ध संस्था घुरहुपुर के नेतृत्व में महोत्सव आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि जन अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेन पाल ने बुद्ध प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अविनाश कुशवाहा ने कहा कि जहां हिंसा के बजाय करुणा, नफरत के बजाय प्रेम और वैरभाव के बजाय मानवता होगी, वहीं वास्तविक शांति और सद्भाव स्थापित होगा। भगवान बुद्ध का संदेश केवल सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे अपने आचरण और जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने लोगों से किसी के प्रति बैर-भाव न रखने, चोरी और झगड़े से दूर रहने, नशे व मांसाहार का त्याग करने तथा जीव-जंतुओं के प्रति दया और करुणा रखने का आह्वान किया। कहा कि कमजोर व्यक्ति और किसी भी जीव के प्रति हिंसा न करना ही बुद्ध के विचारों का वास्तविक सम्मान है।
महोत्सव में पूर्व मंत्री रामअचल राजभर, सांसद छोटेलाल खरवार, राष्ट्रीय सचिव राजेश कुशवाहा, जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा, जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर, पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट, जिला उपाध्यक्ष महेंद्र कुशवाहा, जिला पंचायत सदस्य दशरथ सोनकर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र राव, टोनी खरवार, कन्हैया कुशवाहा, रमेश पासवान, राजेश पटेल, बुलबुल मौर्य और देवा सरकार सहित बड़ी संख्या में भंते एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमाशंकर राजभर तथा संचालन वशिष्ट मौर्य ने किया।