मारपीट व दलील उत्पीड़न में चार आरोपी दोषमुक्त

साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ, स्कूली छात्राओं से छींटाकशी का विरोध करने पर हुई थी घटना
वाराणसी। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी, एक्ट) देवकांत शुक्ला की अदालत ने मारपीट व दलित उत्पीड़न के मामले में चार आरोपितों को बड़ी राहत दे दी. महदा, थाना चोलापुर निवासी अरविन्द सिंह, पिंटू सिंह, कच्चू सिंह उर्फ सुजीत व अमरीश गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया. अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास यादव व रवि राय ने पक्ष रखा.
अभियोजन पक्ष के अनुसार मंगोलेपुर, थाना चोलापुर निवासी वादी श्यामला ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था, जिसके बाद 24 अक्टूबर 2005 को चोलापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई.
आरोप था कि 1 अगस्त 2005 को करीब 05:00 बजे शाम अभियुक्तगण बलरामगंज से निवार रोड स्थित प्रा० पाठशाला महदां सन्निकट पुलिया स्थित मौजा महदां, थाना चोलापुर पर बाबा डोगनदेव इण्टर कॉलेज, दानगंज से पढ़कर आने वाले लड़कियों के साथ अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुये छींटाकशी कर रहे थे, गवाहान शिवबली उर्फ करिया, मान उक्त कृत्य करने से मना किये तो सभी मुल्जिमान एक राय होकर उसके लड़के व भतीजे को जाति सूचक शब्द बोलकर भद्दी-भद्दी गाालियां देते हुये लाठी डण्डें एवं लात मुक्का से मारने लगे.
उसके लड़के व भतीजे के शोर पर वादी मौके पर पहुँचा और बीच-बचाव करने लगा तो वह लोग उग्र हो गये और उसको भी लात मुक्का एवं डण्डा से मारने लगे. मुल्जिमान के मारने से वादी, वादी के लड़के एवं भतीजों को भी शरीर पर चोटें आयीं. इस दौरान वादी के बायें हाथ की हड्डी टूट गयी. शोरगुल सुनकर अन्य गवाहान भी मौके पर पहुँच गये और बीच बचाय किये तब जाकर वादी व उसके लड़के व भतीजों की जान बची.
अभियुक्तगण जाते समय धमकी दिये कि यदि कोई कार्यवाही उनके खिलाफ किये तो उनको एक-एक करके हत्या कर देंगे और उसके पूरे परिवार की हत्या कर देंगे।