NEET-UG 2026 पेपर लीक: BJP युवा मोर्चा नेता दिनेश बिंवाल गिरफ्तार, 30 लाख में खरीदा-पर्चा बेचा

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नई दिल्ली: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक घोटाले ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। राजस्थान के जयपुर जिले के जमवा रामगढ़ निवासी BJP युवा मोर्चा के जिला मंत्री दिनेश बिंवाल और उनके भाई मांगीलाल बिंवाल को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 15 से 30 लाख रुपये में लीक पेपर खरीदा और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए छात्रों को बेचा। इस मामले ने BJP सरकार पर विपक्ष के हमले तेज कर दिए हैं, जो संरक्षण और FIR में देरी का आरोप लगा रहा है।

राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सबसे पहले दोनों भाइयों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद मामला CBI के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, दिनेश बिंवाल ने 26 अप्रैल को हरियाणा के गुरुग्राम से 30 लाख रुपये में पेपर खरीदा था। उनके पास मिले ‘गेस पेपर’ में कुल 410 सवाल थे, जिनमें से 120 सवाल NEET केमिस्ट्री सेक्शन से बिल्कुल मैच कर रहे थे। यह पेपर छात्रों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था, जिससे हजारों मेडिकल आकांक्षियों का भविष्य दांव पर लग गया।
दिनेश बिंवाल की BJP से नजदीकी सोशल मीडिया पर वायरल फोटोज से उजागर हो रही है। वे BJP के कई बड़े नेताओं और विधायकों के साथ तस्वीरों में नजर आ रहे हैं, जो मामले को सियासी रंग दे रहा है। CBI अब पूरे नेटवर्क की तह तक जांच कर रही है, जिसमें पेपर लीक के मुख्य स्रोत और अन्य शामिल सदस्यों का पता लगाया जा रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने BJP सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “पेपर लीक में BJP का अपना नेता पकड़ा गया, फिर भी FIR दर्ज करने में देरी क्यों? क्या सरकार का संरक्षण था?” विपक्षी दलों ने केंद्र और राज्य सरकार से पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि यह घोटाला NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब लाखों छात्र अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
BJP ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि आरोपी के संगठन से निष्कासन पर विचार चल रहा है। इस बीच, NEET-UG 2026 की परीक्षा परिणामों और पुनः परीक्षा की मांग तेज हो गई है।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण के आरोपों से राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ रहा है। CBI की आगे की जांच से और खुलासे होने की उम्मीद है।

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