राजर्षि राजित यादव ने अपने सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं किया-शालिनी

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पूर्व नेता राजर्षि राजित प्रसाद यादव की तीसरी मियामत का कार्यक्रम हुआ।
रिपोर्ट ! संजय कुमार दिनकर 
चंदौली 
चहनियाँ। राजऋषि प्रसाद यादव ने अपने जीवन काल में अपने सिद्धांतों पर कभी सहमति नहीं जताई। उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी राजनीति की सूचनाएं स्थापित कीं। उनका आचरण, आचरण, बातचीत का लहज़ा सब आज की पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। इसमें कहा गया है पूर्व कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी नेत्री शालिनी यादव के।

 रविवार को सैदपुर के दो बार विधायक रहे स्व.राजित प्रसाद यादव की सारनाथ में तीसरी बार “आधुनिक समय में राजित प्रसाद के विचार” विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं।

     मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि राजित बाबूजी के सिद्धांत और आर्थिक प्रशंसा थे। दो बार के प्रमुख रहने के बाद भी अपने लिए न तो घर खरीदें और न ही कभी किसी गाड़ी की जरूरत महसूस करें। उन्होंने अपने जीवन के एक संत काज को शामिल किया, जो राजनीतिक के होनहारों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

    इसके पूर्व चित्रकार ने स्व. राजित प्रसाद यादव की प्रतिमा पर राजित प्रसाद यादव की प्रतिमा पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन उनके ज्येष्ठ पुत्र डाॅ. भारत रत्न यादव ने,अध्यक्ष पन्नालाल यादव, शंखवदन रामजन्म योगी और आदर्श प्रमाण बाबूजी के दत्तक पुत्र राकेश यादव ने कहा।

   इस अवसर पर मनोज यादव कोनिया, रामलाल सेठ, सुरेश अकेले, राजेश निशाद, सईद सरफराज पहलवान, डॉ. स्वप्न, जुनैद कबीर, पशुप्रेमी रमेश यादव डब्लू, प्रशांत यादव, अखिलेश यादव, लालजी चंद्रवंशी, जंत्रलेश्वर यादव, डॉ. बयासी हुसैन, त्रिलोकी पांडे, सेंचुरी यादव, श्रीप्रकाश यादव, डॉ. अंकित यादव, सुनील यदुवंशी, कैलाश विश्वकर्मा, सत्या यादव, विजय बहादुर यादव, रामानुज यादव आदि लोग उपस्थित रहे।

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