RTE एक्ट से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की मांग, सांसद वीरेंद्र सिंह को सौंपा ज्ञापन

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संसद में मुद्दा उठाने और प्राइवेट बिल लाने का सांसद ने दिया आश्वासन
चंदौली। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ व टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्देश पर शिक्षकों ने लोकसभा सांसद चंदौली वीरेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। संघ ने सुप्रीम कोर्ट के टीईटी संबंधी आदेश के बाद संसद से अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन किए जाने की मांग की।

शिक्षक नेताओं ने सांसद से अनुरोध किया कि संसद के वर्तमान सत्र में इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक विधायी संशोधन कराया जाए, ताकि उनकी नौकरी सुरक्षित रह सके।
शिक्षक संघ के जिला संयोजक आनंद सिंह एवं बरहनी ब्लॉक अध्यक्ष यशवर्धन सिंह ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई की अधिसूचना से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था। ऐसे शिक्षक 20 से 25 वर्षों तक शिक्षा विभाग में उत्कृष्ट सेवाएं दे चुके हैं। अब सेवा के अंतिम पड़ाव पर उन्हें टीईटी परीक्षा के लिए बाध्य करना न्यायसंगत नहीं है और इससे उनके भविष्य पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद सांसद वीरेंद्र सिंह ने शिक्षक प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि वे शिक्षकों की आजीविका, सम्मान और सेवा सुरक्षा के मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से उठाएंगे। उन्होंने आवश्यक संशोधन के लिए प्राइवेट बिल लाने तथा सरकार से इस संबंध में सकारात्मक पहल कराने का भी भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की चंदौली जिला इकाई एवं बरहनी ब्लॉक के पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें यशवर्धन सिंह, कृष्णा बिहारी, दुर्गेश यादव, ओमप्रकाश निराला, प्रदीप सिंह, बाबूलाल मौर्य, गौरव मौर्य, मोहम्मद अकरम, प्रमोद कुशवाहा, रामाश्रय आर्य, रविंद्र यादव, चंद्रकांत सिंह, अवनीश यादव, हंसराज यादव सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।

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