सकलडीहा पीजी कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता, विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
सकलडीहा पीजी कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक अभिव्यक्ति और मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित किया गया। पोस्टर निर्माण और संवाद के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने तथा जरूरतमंदों को सहयोग देने का संदेश दिया गया।
सकलडीहा, चंदौली। सकलडीहा पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक समस्याओं को खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों ने संदेशपरक पोस्टरों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। तनावपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना, अपनी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर शिक्षकों, परिवार या विशेषज्ञों से सहायता लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. सीता मिश्रा ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भावनात्मक स्वास्थ्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और विद्यार्थियों की भावनात्मक जरूरतों को समझने से उन्हें बेहतर सहयोग दिया जा सकता है।
विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना कुमारी ने जीवन के वास्तविक अनुभवों को ध्यानपूर्वक सुनने और समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव और मानसिक संघर्ष अलग होते हैं। इसलिए किसी की बात सुने बिना उसके अनुभवों के बारे में धारणा नहीं बनानी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों की भावनाओं का सम्मान करना, उनकी समस्याओं को समझना और जरूरत के समय सहयोग देना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने पर भी जोर दिया। कहा कि लोगों को अपनी समस्याएं साझा करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त कर सकें।
पोस्टरों के जरिए दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर आकर्षक और संदेशपरक पोस्टर बनाए। इसके माध्यम से उन्होंने अपनी सोच और विचारों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने तनाव, भावनात्मक चुनौतियों और मानसिक समस्याओं से जुड़े अनुभवों पर भी खुलकर चर्चा की।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानियों पर खुलकर बात करना, दूसरों के अनुभवों को समझना और आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेना स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
कार्यक्रम का संदेश रहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। लोगों को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनना, उनकी भावनाओं का सम्मान करना और उन्हें सहयोग देना निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच और भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में संवाद और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित किया।