स्वच्छ भारत-सुंदर भारत को आईना दिखा रहा सकलडीहा बाजार, अंबेडकर तिराहे से ग्राम सचिवालय तक कूड़े का अंबार
स्वच्छ भारत अभियान की असली सफलता प्रचार में नहीं, बल्कि साफ सड़कों, स्वच्छ सार्वजनिक स्थलों और नियमित कूड़ा निस्तारण में है। प्रशासन को जवाबदेही तय कर समयबद्ध सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए, वहीं नागरिकों को भी कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने में सहयोग करना चाहिए। सरकार, प्रशासन और समाज की साझा जिम्मेदारी से ही स्वच्छता का संकल्प हकीकत बनेगा।

फोटो: अंबेडकर तिराहा पर लगा कूड़े का अंबार
सकलडीहा, चंदौली। स्वच्छ भारत-सुंदर भारत का सपना, लेकिन सकलडीहा बाजार की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अंबेडकर तिराहे से लेकर ग्राम सचिवालय तक फैली गंदगी और कूड़े का अंबार स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। जिस अभियान का उद्देश्य गांवों और कस्बों को स्वच्छ बनाना है, उसके दावों के बीच सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का जमाव व्यवस्था की जवाबदेही पर सीधा सवाल है।
बाजार में सफाई की बदहाल स्थिति से स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में नाराजगी है। नवरात्र जैसे पर्व पर धार्मिक स्थलों तक जाने वाले रास्तों पर गंदगी रहना व्यवस्था की गंभीरता को उजागर करता है। श्रद्धालुओं और राहगीरों को स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए, लेकिन यहां सफाई के दावों और जमीनी तस्वीर के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।
ग्राम सचिवालय के गेट पर ही स्वच्छता को चुनौती
ग्राम सचिवालय, जिसे ग्रामीणों की सुविधाओं और विकास कार्यों का प्रमुख केंद्र होना चाहिए, उसके मुख्य द्वार पर कूड़ा जमा होने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी धन से उपलब्ध कराए गए कूड़ेदानों का समुचित इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यदि कूड़ेदान मौजूद हैं, तो उनका उपयोग क्यों नहीं हो रहा और नियमित कूड़ा उठान की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? ये सवाल जवाब मांगते हैं।
सामुदायिक शौचालय के बंद रहने और सकलडीहा की मुख्य नहर में कचरा जमा होने की शिकायतें भी स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। इन मामलों की वर्तमान स्थिति की जांच कर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
आश्वासन नहीं, जमीन पर दिखे सफाई
व्यापार मंडल अध्यक्ष कृष्णा सेठ ने बाजार की सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए ब्लॉक प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है। व्यापारियों के मुताबिक, इस समस्या से पहले भी अधिकारियों को अवगत कराया गया था और नियमित सफाई का आश्वासन मिला था। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने का आरोप है।

कृष्णा सेठ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो व्यापारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका स्पष्ट संदेश है कि बाजार की स्वच्छता केवल कागजों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका असर सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक मार्गों पर दिखाई देना चाहिए।
प्रशासन की जवाबदेही तय हो
सकलडीहा बाजार की स्थिति एक बुनियादी सवाल खड़ा करती है—जब स्वच्छता अभियान पर जोर दिया जा रहा है, तो सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े का जमाव क्यों बना हुआ है? नियमित सफाई, समय पर कूड़ा उठान, कूड़ेदानों का उपयोग और जिम्मेदार कर्मचारियों की निगरानी सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब जरूरत निरीक्षण और आश्वासन से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की है। संबंधित अधिकारियों को सफाई व्यवस्था की जांच कर कमियों को दूर करना चाहिए, ताकि सकलडीहा बाजार गंदगी की पहचान नहीं, बल्कि स्वच्छता की मिसाल बने।