दूरदर्शन पर छाया ‘शब्द सुरभि’, कला-साहित्य और संस्कृति की बिखेर रहा खुशबू

शब्द सुरभि’ की विशेषता साहित्य, ज्ञान और मनोरंजन का मेल है। कार्यक्रम की निरंतर गुणवत्ता और विषयों की विविधता इसे दर्शकों के बीच मजबूत पहचान दिलाने में निर्णायक होगी।

डॉ. मुकेश गौतम की प्रस्तुति में साहित्यिक हस्तियों से संवाद और कवियों का काव्य पाठ; सप्ताह में तीन दिन होता है प्रसारण

नई दिल्ली। दूरदर्शन सह्याद्री पर प्रसारित कार्यक्रम ‘शब्द सुरभि’ कला, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को मंच दे रहा है। प्रसिद्ध हास्य कवि एवं लेखक डॉ. मुकेश गौतम द्वारा प्रस्तुत इस कार्यक्रम का प्रसारण प्रत्येक रविवार, सोमवार और बुधवार को होता है। इसमें साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति जगत की हस्तियों से संवाद के साथ प्रसिद्ध कवियों का काव्य पाठ भी प्रस्तुत किया जाता है।

प्रसारण शुरू होने के कुछ ही सप्ताह में कार्यक्रम ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। इसकी प्रस्तुति में साहित्यिक विमर्श, अतिथियों के अनुभव और मनोरंजन का संतुलन रखा जाता है, ताकि दर्शकों को जानकारी के साथ रोचक अनुभव भी मिले।

सोच-समझकर चुने जाते हैं विषय

डॉ. मुकेश गौतम के अनुसार, प्रत्येक एपिसोड के लिए विषय का चयन इस उद्देश्य से किया जाता है कि दर्शकों को कुछ नया और उपयोगी जानने का अवसर मिले। विषय के अनुरूप अतिथियों को आमंत्रित किया जाता है, ताकि उनके अनुभवों और विचारों के माध्यम से कला, साहित्य और समाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने लाया जा सके।

कार्यक्रम में दर्शकों की जिज्ञासाओं का समाधान करने और ऐसी जानकारियां साझा करने पर जोर दिया जाता है, जो उनके जीवन और सोच को प्रभावित कर सकें।

गंभीर चर्चा के साथ मनोरंजन

डॉ. गौतम का प्रयास है कि कार्यक्रम ज्ञानवर्धक होने के साथ सहज और रोचक भी बना रहे। इसके लिए गंभीर चर्चाओं के बीच हल्के-फुल्के मनोरंजक क्षण शामिल किए जाते हैं। प्रसिद्ध कवियों की रचनाएं और साहित्यिक हस्तियों के अनुभव कार्यक्रम को विविधता प्रदान करते हैं।

साहित्य को दर्शकों से जोड़ने की पहल

मनोरंजन के अनेक विकल्पों के बीच ‘शब्द सुरभि’ साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे कार्यक्रम रचनाकारों को मंच देने के साथ साहित्य के प्रति रुचि विकसित करने और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में उपयोगी हो सकते हैं।