जब तक कोई बात तर्क की कसौटी पर खरी नही उतरे तब तक उसे नही मानना: ज्ञानेन्द्र

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चन्दौली,
डीडीयू नगर। पंचशील तथा जिओ और जीने दो के सिंद्धान्त से पूरी दुनिया को आलोकित कर पाखण्डपूर्ण विधानों को काल्पित बताने वाले महामानव गौतम बुद्ध की जयंती त्रिविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर अलीनगर वार्ड नंबर 3 में गुरुवार को मनाई गई। कार्यक्रम की शुरूआत सर्वप्रथम भंते बुद्धहंस , के. पी. राम और बुद्ध अनुयाइयों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर त्रिशरण, पंचशील का पाठ किया गया ।




कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भंते ज्ञानेंद्र सिद्धार्थ ने कहा कि नेपाल के लुम्बिनी में राजपरिवार में बैशाख पूर्णिमा के 563 ईसा पूर्व में जन्में सिद्धार्थ ने सभी प्राणियों में मङ्गल मैत्री कैसे प्राप्त हो, पर विचार करने के लिए 35 वर्ष की आयु में बैराग ले लिया और बोधगया में बोधी बृक्ष के नीचे बैठकर 06वर्ष तक कठोर तपस्या के तदोपरांत सिद्धार्थ से बुद्ध बन गए। तब उन्होंने कहा जब तक कोई बात तुम्हारे तर्क की कसौटी पर खरी नही उतरे,तब तक उसे नही मानना। अंधविश्वास, पाखण्ड और चमत्कार से मुक्त हो जाओगे।अपना दीपक स्वयं बनो।

 


मुख्य वक्ता डॉ कंचन शीला संघमित्रा ने कहा सत्य की समझ इनकी तालमेल मे दिखता है।बुद्ध द्वारा दी गई शाश्वत बुद्धि और ज्ञान आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है। वहीं विशिष्ट वक्ता अरुण कुमार ने कहा बुद्ध का मानना है कि जीवन में अनिश्चितताएँ, अभाव के कारण असंतोष और व्यक्तियों के बीच स्वार्थी प्रतिस्पर्धा, यदि ये किसी देश में मौजूद हैं, तो यह स्पष्ट है कि उस देश के लोगों के पास विवेक की पूर्ण शक्तियां नहीं हैं। जिस देश में लोग स्वतंत्र रूप से और संतुष्टि में रहते हैं, उससे पता चलता है कि वहां के नियम विवेक-सम्मत हैं।


इस दौरान , सत्येन्द्र प्रताप, राजाराम, राजेन्द्र प्रसाद, विजई मिस्त्री, गुल्लू गौतम, कृष्णावती सहित अन्य उपस्थित रहे। बीच बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रम से राजेश आजाद ने लोगों के मन को मोहे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लल्लन कुमार (प्रदेश महासचिव लार्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति) तथा संचालन डॉ. रविकांत ने किया।        

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