भारत का संविधान दुनिया में सबसे मजबूत और सर्वोच्च है-अर्जुन आर्या

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चंदौली,  सदर ब्लॉक अंतर्गत जगदीशसराय स्थित केशरी लॉन में लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के बैनर तले विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी संविधान दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. 



कार्यक्रम की शुरुआत भंते बोधिशरण बौद्ध के द्वारा गौतम बुद्ध, संत रैदास और डॉ भीमराव अंबेडकर के तैल चित्र पर माल्यार्पण, पुष्प अर्पित और दीप प्रज्ज्वलित कर त्रिशरण पाठ किया गया. वहीं विधि अधिकारी रामसुभाष ने संविधान की प्रस्तावना का पाठन तथा भरतीय संविधान मे उल्लेखित मूल कर्तव्यो के संबंध में शपथ ग्रहण कराया तथा यह भी बताया कि हम सभी राष्ट्र की एकता और अखंडता बढाने के लिए दृढसंकल्प होकर अपनी इस संबिधान सभा में इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं.अन्त में आए हुए अतिथियों को माल्यार्पण कर अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया. साथ ही सैकड़ों जरुरत मंदो में कंबल का वितरण किया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए(LBDASS) प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन प्रसाद आर्या ने कहा कि हमारा संविधान दुनिया में सबसे मजबूत और सर्वोच्च है. जो मानवीय मूल्यों की पूर्ण जिम्मेदारी से निर्वहन करते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर जोर देता है साथ ही राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देते हुए संवैधानिक आदर्श, अधिकारों और प्रतिबद्धताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाता है.

प्रमुख समाजसेवी परवेज कादिर खां कहा कि भारतीय संविधान कागज के कुछ टुकड़े नहीं बल्कि यह हमारे संस्कृतिक, सामाजिक लोकतांत्रिक विरासत की वह धरोहर है जिसके लिए अनेको वीरों ने अपने जान न्योछावर कर दी. इसकी गरिमा की रक्षा करना हर एक भारतीय का अक्षुण्ण कर्तव्य है. उनके देशप्रेम, निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता को नमन किया.

इस अवसर पर संजय भास्कर, पप्पू लहरी, सरोज प्रधान, पप्पू राजा, मारकंडे गाजीपुरी, ने मिशन गीत गाकर व शोभनाथ इन्टर कॉलेज नीलकंठ की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. 

संविधान दिवस के अवसर पर आर के प्रसाद, विजय बहादुर उप सचिव पटना, जयचंद कुमार रामगढ़ी बिहार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अश्वनी कुमार, आनंद कुमार, मु. जोखू सिद्दीकी, एड हीरालाल, एड. विजय कुमार, एड अरविंद पंकज, एड अरुण कुमार, वीरेंद्र कुमार भारती, हरिनारायण राम, राजनाथ, प्रेमशंकर, विनय कुमार, अरुण रत्नाकर, निठोहर सत्यार्थी, गिरिजेश दादा, रामदिलास, त्रिलोकी नाथ, ज्ञानचंद, भाईराम प्रधान, सहित हजारों की संख्या में महिलाएं पुरुष मौजूद रहे.
संचालन एड रामजन्म बागी और लल्लन कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

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