16 वर्षीय राधे कृष्ण रस्तोगी ने तैयार किया हेल्थकेयर स्टार्टअप का MVP, अस्पताल-एम्बुलेंस नेटवर्क को जोड़ने की पहल

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कमालपुर (चंदौली)। जहां अधिकांश छात्र अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं, वहीं चंदौली जिले के कमालपुर कस्बा निवासी प्रमोद रस्तोगी के 16 वर्षीय पुत्र राधे कृष्ण रस्तोगी ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने “ApkaBachav by Lifenerula” नाम से एक हेल्थटेक स्टार्टअप का एमवीपी (Minimum Viable Product) विकसित किया है, जिसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

राधे कृष्ण रस्तोगी

राधे कृष्ण द्वारा तैयार किए गए इस तकनीकी मॉडल में अस्पताल और एम्बुलेंस ऑपरेटरों के लिए अलग-अलग डैशबोर्ड विकसित किए गए हैं, जिससे मरीज से जुड़ी आवश्यक जानकारी का त्वरित आदान-प्रदान संभव हो सके। उनका मानना है कि समय पर सूचना मिलने से मरीज को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
राधे कृष्ण रस्तोगी ने बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट का विचार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होने की समस्या को देखकर आया। उन्होंने कहा, “मेरा उद्देश्य ऐसा सरल और प्रभावी समाधान विकसित करना है, जिससे दूर-दराज के गांवों में रहने वाला कोई भी मरीज समय पर इलाज से वंचित न रहे।”
स्थानीय स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी
फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती तकनीकी चरण (MVP) में है। अब राधे कृष्ण स्थानीय अस्पतालों और एम्बुलेंस सेवाओं के सहयोग से इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस ट्रायल के दौरान मिलने वाले सुझावों और अनुभवों के आधार पर सिस्टम को और अधिक उपयोगी एवं प्रभावी बनाया जाएगा।
AI आधारित हेल्थ नेटवर्क बनाने का लक्ष्य
राधे कृष्ण का सपना केवल चंदौली तक सीमित नहीं है। भविष्य में वे इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करना चाहते हैं, ताकि मरीज की स्थिति का विश्लेषण कर उसे स्वतः सबसे उपयुक्त अस्पताल से जोड़ा जा सके। एमवीपी के सफल परीक्षण के बाद उनकी योजना इसे वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के मेडिकल नेटवर्क से जोड़ने की है।
कमालपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में किया गया यह प्रयास स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। राधे कृष्ण का कहना है, “बड़े बदलाव केवल महानगरों से नहीं, बल्कि छोटे गांवों और कस्बों से भी शुरू हो सकते हैं।”

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