आश्वासन के सात महीने बाद भी धूल फांक रही अंबेडकर की प्रतिमा

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सकलडीहा तिराहे पर छतरी का इंतजार, वाचनालय का भी नामोनिशान नहीं, जनता में उबाल

सकलडीहा (चंदौली): उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के सकलडीहा कस्बे में हाईवे निर्माण के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए हंगामे की धूल अभी जम नहीं पाई थी कि अब नई चुनौती खड़ी हो गई है। सात महीने पहले अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बावजूद प्रतिमा पर छतरी नहीं लगी और वाचनालय का निर्माण तो दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। हाईवे के मुख्य मार्ग पर धूल-गर्द में खड़ी यह प्रतिमा अब स्थानीय लोगों के आक्रोश का प्रतीक बन चुकी है। शासन के सौंदर्यीकरण निर्देशों के बावजूद कार्यदायी संस्था की लापरवाही से बाबासाहेब का अपमान हो रहा है, जिससे समाज के हर वर्ग में रोष व्याप्त है।


फोटो : सकलडीहा तिराहे पर धूप-बारिश से असमंजस में खड़ी डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा – छतरी विहीन, 


यह विवाद बीते साल सकलडीहा हाईवे पर सड़क चौड़ीकरण के दौरान शुरू हुआ था। प्रतिमा स्थल चयन को लेकर तहसील प्रशासन के सामने संकट खड़ा हो गया। स्थानीय लोगों का उग्र प्रदर्शन और एसडीएम कुंदन राज कपूर का मौके पर पहुंचना ही अंतिम क्षणों में विवाद समाप्त कर सका। प्रतिमा तो स्थापित हो गई, लेकिन अधिकारियों ने वादा किया था कि छतरी और वाचनालय का निर्माण शीघ्र कराया जाएगा। लिखित मांग के बाद भी सात माह गुजर गए, पर हाईवे की तेज धूल और ट्रकों की आवाजाही में प्रतिमा जर्जर होती जा रही है। बारिश के मौसम में तो यह और भी खराब हो जाएगी, क्योंकि कोई सुरक्षा कवच नहीं है।
स्थानीय निवासियों ने कई बार एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कार्यदायी संस्था ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।इस लापरवाही से दलित समाज समेत सभी वर्गों में गुस्सा भरा है।

अर्जुन प्रसाद आर्य, रामराज राजभर, सीताराम सक्सेना, उमाकांत, दुलारे लाल, के.के. सोनी, सोनू पटेल, रमेश राम, राजकुमार, टोनी चौधरी, सतीश चंद्र, सुरेंद्र यादव जैसे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से तत्काल छतरी लगाने और वाचनालय बनाने की मांग की है। उनका कहना है, “बाबासाहेब संविधान के रचयिता हैं, उनकी प्रतिमा को इस तरह धूल चाटने देना अपमानजनक है।

शासन की योजनाओं का मजाक उड़ाया जा रहा है।”
इस मामले पर एसडीएम कुंदन राज कपूर ने बताया, “कार्यदायी संस्था को छतरी और वाचनालय निर्माण के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही कार्य पूरा कराया जाएगा।” लेकिन स्थानीय लोग अब मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर रहे। वे चेतावनी दे रहे हैं कि अगर शीघ्र काम नहीं हुआ तो आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी। सकलडीहा जैसे व्यस्त तिराहे पर यह प्रतिमा न केवल सांस्कृतिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। प्रशासन अगर समय रहते जागा तो बड़ा विवाद टल सकता है।

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