निजी स्कूलों का नई किताबों का तमाशा: पिछले साल की किताबें इस साल ‘रद्दी’- पिंटू पाल

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शिक्षा को शुद्ध व्यापार बना चुके शिक्षा माफिया, पुरानी किताबें गलत थीं तो बच्चों को गलत क्यों पढ़ाया गया? सही थीं तो रद्द क्यों?

सिलेबस का बहाना या कमीशनखोरी का खेल? सिलेबस में मामूली बदलाव फिर भी नई किताबें जबरन थोपी जाती 

पब्लिशर- स्कूल का गठजोड़, 500 से 800 रुपए पर किताब, प्रति बच्चा पर 5 से 10 हजार सालाना बोझ ,1000 बच्चों पर लाखों का खेल।

NCERT किताबें सालों चलती हैं, निजी स्कूल हर 6-12 महीने में नई डिमांड, RTE और CBSE नियमों का सीधा उल्लंघन 

अभिभावकों की जेब पर खुलेआम डाका, जिला प्रशासन चुप? जिला शिक्षा अधिकारी जांचें, UP में 2024 के शिक्षा नियमों में किताबें 3साल चलें।

किसान नेता का खुला संदेश जिलाधिकारी जागें, सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दें निजी स्कूलों का लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई करें, वरना अभिभावकों के साथ सड़क पर उतरेंगे  और आंदोलन भड़केगा।



चंदौली। 4 अप्रैल 2026। यूपी के सभी निजी स्कूलों में हर 6-12 महीने में नई किताबें थोपने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शिक्षा को ‘शुद्ध व्यापार’ बना चुके ‘शिक्षा माफिया’ पर अब किसान नेता पिंटू पाल ने सीधी चोट की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पुरानी किताबें गलत थीं तो बच्चों को गलत क्यों पढ़ाया? सही थीं तो रद्द क्यों? सिलेबस का बहाना या कमीशनखोरी का खेल?”




पब्लिशर-स्कूल गठजोड़ का काला कारोबार
पाल के अनुसार, प्रति किताब 500-800 रुपये वसूलकर प्रति बच्चे पर सालाना 5-10 हजार का बोझ डाला जा रहा है, जबकि 1000 बच्चों वाले स्कूल में यह लाखों का खेल बन जाता है। NCERT किताबें सालों चलती हैं, लेकिन निजी स्कूल हर छमाही नई डिमांड करते हैं, जो RTE और CBSE नियमों का उल्लंघन है। लखनऊ के एक अभिभावक ने कहा, “सिलेबस में सिर्फ 10-20% बदलाव होता है, बाकी वही सामग्री फिर ‘रद्दी’ बता दी जाती है। यह “पब्लिशर-स्कूल गठजोड़ का काला कारोबार नहीं तो और क्या है?

कानूनी उल्लंघन और प्रशासन की चुप्पी
CBSE/UP बोर्ड नियमों के तहत किताबें 1-2 साल ही बदली जा सकती हैं, हर 6 महीने बदलना अमान्य है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में इसे ‘अनुचित व्यापार प्रथा’ माना गया है। 2024 के UP शिक्षा नियमों में किताबें 3 साल चलने का प्रावधान है, लेकिन जिला प्रशासन चुप है। शिक्षा विभाग अधिकारी ने कहा, “शिकायतें आती हैं, पर स्कूल सिलेबस अपडेट का हवाला देते हैं। सख्ती जरूरी है।”

पिंटू पाल की चेतावनी
पाल ने जिलाधिकारी से अपील की, “DEO जांचें, पुरानी किताबें 3 साल चलें। सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दें, निजी स्कूलों का लाइसेंस रद्द करें, वरना अभिभावकों संग सड़क पर उतरेंगे। “आंदोलन भड़केगा”। अन्यथा निजी स्कूलों में डिजिटल किताबें और NCERT मॉडल लागू किया जाए।  NCERT 2026-27 से नई किताबें ला रहा है, जो प्रिंट और ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। जिससे अभिभावकों की जेब पर कम भर होगी।

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