चंदौली में झोलाछाप डॉक्टर ने ले ली एक और जान, भोजापुर में इंजेक्शन लगते ही महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
भोजापुर में पुष्पा की मौत ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामूली बुखार और बदन दर्द के इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाने पहुंची महिला की मौत से तीन बच्चे मां के साये से वंचित हो गए। अब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की जवाबदेही का है, जिसके बीच कथित झोलाछापों की पहुंच मरीजों की जिंदगी तक बनी हुई है।

फोटो; मृतक पुष्पा देवी की फाइल फोटो
चंदौली। जिले में कथित झोलाछाप चिकित्सकों का जाल लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के भोजापुर गांव में शनिवार को इंजेक्शन लगाने के बाद 34 वर्षीय पुष्पा की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक के इंजेक्शन लगाते ही उनकी हालत बिगड़ गई। मुंह से झाग निकलने लगा और वह बेसुध हो गईं। आनन-फानन में उन्हें सकलडीहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, पुष्पा को हल्का बुखार और शरीर में दर्द था। इस पर उनका 14 वर्षीय बेटा नीरज भोजापुर नहर के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचा। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक ने इंजेक्शन लगाने की बात कही और घर पहुंच गया। नीरज के मुताबिक, इंजेक्शन लगाते ही मां की हालत बिगड़ने लगी। उनके मुंह से झाग निकलने लगा और वह बेसुध हो गईं। मां की बिगड़ती हालत देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई।
इसके बाद मेडिकल स्टोर संचालक पुष्पा को उनके बेटे नीरज के साथ सकलडीहा सीएचसी ले गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके प्रसाद ने बताया कि महिला को सीएचसी में मृत अवस्था में लाया गया था।

तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया
पुष्पा के पति नरेंद्र कुमार चेन्नई में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। वह गांव में अपने तीन बच्चों के साथ रहती थीं। 14 वर्षीय बेटा नीरज, 12 वर्षीय बेटी नित्या और 10 वर्षीय बेटी रिया के लिए मां ही सबसे बड़ा सहारा थीं। अचानक हुई इस घटना ने तीनों बच्चों की दुनिया उजाड़ दी। जिस मां की गोद में उनका बचपन सुरक्षित था, अब उसी मां के बिना उन्हें जिंदगी का सामना करना पड़ेगा। घटना से परिवार और गांव में शोक का माहौल है।
मौके पर पहुंची पुलिस, मेडिकल स्टोर संचालक की भूमिका पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सकलडीहा कोतवाली प्रभारी भूपेंद्र कुमार निषाद पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। अब सवाल यह है कि मेडिकल स्टोर संचालक के पास इंजेक्शन लगाने की वैध चिकित्सकीय योग्यता थी या नहीं? किस परिस्थिति में इंजेक्शन लगाया गया और महिला की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर फिर उठे सवाल
भोजापुर की घटना ने जिले में बिना उचित चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने वालों पर नियंत्रण के दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर और कथित क्लीनिकों की गतिविधियों की नियमित जांच की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। इसके बावजूद यदि बिना योग्यता वाले लोग घरों तक पहुंचकर इंजेक्शन लगा रहे हैं तो यह निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है। संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक की योग्यता, पंजीकरण, इंजेक्शन और उपचार से जुड़े तथ्यों की जांच कराई जानी चाहिए। यदि लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कब रुकेगा और ग्रामीणों को सुरक्षित चिकित्सा सुविधा कब मिलेगी?