Headlines

चंदौली के धानापुर में चकबंदी माफिया का काला खेल

सरकारी व गरीबों की जमीनें हड़पीं, स्कूल व श्मशान को भी नहीं बख्शा, बेचकर कमाया भारी मुनाफा, पीड़ितों की गुहार बेकार, 

धानापुर,चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का यह इलाका भू-माफियाओं का अड्डा बन चुका है। चकबंदी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी जमीनें और गरीबों के खेत हेराफेरी कर माफियाओं के नाम दर्ज हो गए हैं, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।


माफियाओं का लंबा खेल
चकबंदी प्रक्रिया के नाम पर वर्षों से धांधली चली आ रही है। राजस्व व चकबंदी विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ से ग्राम सभा की जमीनें—यहां तक कि स्कूल और शमशान भूमि—मालियत लगाकर माफियाओं के चहेतों के नाम करा दी गई हैं, बेचकर भारी मुनाफा कमाया गया है। एक पूर्व मोबाइल दुकानदार अब दलाल बनकर कई जिलों में संपत्ति जमा चुका है, जो इस भ्रष्टाचार की जड़ को उजागर करता है। ओदरा गांव के रामनिवास यादव जैसे पीड़ितों के 1996 की रजिस्ट्री वाली जमीन पर जबरन कब्जा कर रोड में तब्दील कर दिया गया। 

किसानों का आक्रोश और जुलूस
पीड़ितों की बार-बार गुहार के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अखिल भारतीय किसान महासभा ने शहीद पार्क पर धरना दिया, जहां पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्ल्यू ने गाटा नंबरों में हेरफेर का आरोप लगाया। सोमवार को माले कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध जुलूस निकाला, नारा लगाते हुए—”जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है!”, “चकबंदी प्रक्रिया बंद करो”, “भूमाफियों के खिलाफ कार्रवाई करो” —जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि माफिया ऊंचे दामों पर जमीनें बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

जांच की मांग तेज
धानापुर ब्लॉक में ओदरा, कुसम्ही व महुंजी गांव समेत कई जगहों पर चकबंदी में अनियमितताओं की शिकायतें पुरानी हैं। सीओ चकबंदी ने वादा किया था कि सरकारी जमीनें वापस ली जाएंगी, मगर जमीनी हकीकत अलग है। मिर्जापुर जैसे आसपास के मामलों में डीएम ने एक्शन लिया, लेकिन धानापुर में अभी जांच का इंतजार। पीड़ित अब उच्चाधिकारियों तक पहुंचने की तैयारी में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *