सोनम वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब, 18 दिन भूख हड़ताल से बिगड़ती सेहत

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शिक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ वांगचुक का अनशन, अदालत तक पहुंचा मामला,
वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर जुटी भीड़, संसद तक पद यात्रा का ऐलान

नई दिल्ली, 15 जुलाई — प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गया। वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा से जुड़े मुद्दों, NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा धांधली के खिलाफ बैठे हैं। इस आंदोलन ने अब न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर ध्यान खींचा है। वांगचुक और उनके समर्थक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, साथ ही परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक वांगचुक 18 दिनों से अनशन पर हैं और इस दौरान उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक घट गया है। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत बिगड़ने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। समर्थकों का कहना है कि वह छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहे हैं, क्योंकि परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा सवाल है।
इसी बीच उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि वांगचुक को तुरंत मेडिकल सुविधा, जीवनरक्षक उपचार और तरल पोषण उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी जान को खतरा न हो। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने संकेत दिया है कि यह मामला स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए इसमें शीघ्र सुनवाई जरूरी है।
आंदोलन को अब व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। जंतर-मंतर पर कई छात्र संगठन और कुछ बॉलीवुड हस्तियों की मौजूदगी ने इस प्रदर्शन को और बड़ा स्वरूप दे दिया है।प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक पदयात्रा का भी ऐलान किया है, जिससे यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। समर्थकों का कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक का यह अनशन अब केवल विरोध-प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल बन गया है। अदालत, सरकार और आंदोलनकारी—तीनों की अगली कार्रवाई पर अब देश की निगाहें टिकी हैं।

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