अपनी मिट्टी से जुड़े रहने मे ही भलाई है-अर्जुन आर्या

e2a80ee3705e

समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे को पढ़कर उनके भावो को समझना ही संत को संत बना देता है 


चंदौली, 26 फरवरी। जिले के सुदूर जंगल के हसीन वादियों में नौगढ़ स्थित अंबेडकर पार्क में संत गाडगे जयंती विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाई गई. इस दौरान उपस्थित वक्ताओं द्वारा उनके जीवन संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके पग चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन प्रसाद आर्या ने कहा कि संतों को मानवता की शिक्षा कैसे मिलती है, कैसे इनके अंदर करुणा का भाव आता है?
उन्होंने कहा कि महापुरुष समाज के अंतिम व्यक्ति तक घूम घूम कर उनकी कथा सुनते हैं. उनके व्यथा में रुककर उनके सुधार का इंतजार करते हैं. तब कहीं जाकर उनके अंदर गरीब लोगों की व्यथा को समझते हैं 
तथा उनके अंदर करुणा भाव पैदा होता है. समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे को पढ़कर उनके भावो को समझना ही संत को संत बना देता है. अशिक्षित लोगों को अपनी मिट्टी से जुड़े रहते देखना उनके अंदर करुणा भाव पैदा होना ही मानवता को जिंदा रखे हुए हैं.

आज इस देश में तथाकथित सामाजिक विद्वानों की भीड़ लग चुकी है उदाहरण आप के सामने है राष्ट्र संत की संज्ञा जिसे मिलना चाहिए. उसे नहीं मिला जो सामाजिक नीचता कर रहा हो उसे राष्ट्र संत बना दिया. जो समाज को सही रास्ते पर चलना सीखा कर आज तक समाज के बिखराव को रोके हुए हैं उसको राष्ट्र संत की संज्ञा नही दी गई. इसलिए संत गाडगे के पग चिन्हों पर चलते हुए अपनी मिट्टी से जुड़े रहने मे ही भलाई है.

समाज के दूसरे विचार धारा से जुड़ने में आप बिखर जाएंगे. परिस्थितियां बीते हुए लोक सभा चुनाव को प्रदर्शित कर रही है. एक वर्ग ने बसपा के मूल वोटर को आरक्षण बचाने के नाम पर अपनी तरफ खींचने में सफल रहा. और आज पूरे उत्तर प्रदेश में उसी पार्टी के कार्यकर्ता बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं को बूरी तरह से पीट रहे हैं. अब बसपा के कार्यकर्ता पश्चाताप की आंसू बहा रहे हैं. अब पछताएं होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत. यह कहावत को दोबारा चरितार्थ न हो. इस लिए करुणामई दृष्टि से देखते हुए संतों की भावना को समझते हुए सामाजिक सोच पैदा करें. 
क्योंकि आप का पाप आपके सिर चढ़कर बोलेगा. आपको न्याय चाहिए तो न्यायालय जाना पड़ेगा, नारियार से सिर फूटेगा तो अस्पताल जाना पड़ेगा त्वरित निस्तारण के लिए निर्भीक होना पड़ेगा. क्योंकि कर्म ही प्रधान है.
इस अवसर पर डॉ. कमल कुमार, नंदकिशोर जी, एडवोकेट रामजन्म बागी, एडवोकेट गोकुल प्रसाद, रामचन्द्र राम, आनंद कुमार ‘भाईजी’ उपेंद्र गाडगे, लालता कनौजिया, डॉ. फूलचंद, गणेश कुमार, डॉ. पगला, सहित सैकड़ों महिलाएं पुरुषों ने कार्यक्रम में संबल प्रदान किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता लालब्रत कनौजिया और संचालन विनोद कुमार त्यागी ने किया 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *