चंदौली में किसानों का हाईवोल्टेज आक्रोश

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स्मार्ट मीटर हटाओ, बंदर पकड़ो… तहसील घेरकर 20 दिन का अल्टीमेटम तोड़ा, सकलडीहा तहसील में उबल पड़े किसान, प्रशासन पर भारी दबाव

चंदौली जिले के सकलडीहा तहसील में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। बिजली के स्मार्ट मीटरों से परेशान और बंदरों के आतंक से त्रस्त किसानों ने तहसील कार्यालय का घेराव कर दिया। किसान नेता पिंटू पाल ने एसडीएम को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन 20 दिन गुजरने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से आक्रोश चरम पर पहुंच गया। अब तहसील पर धरना शुरू हो गया है, और किसान चेतावनी दे रहे हैं कि मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन और तेज होगा।

फोटो: किसान नेता पिंटू पाल व अन्य सकलडीहा एसडीएम कुंदन राज कपूर को ज्ञापन देते हुए।

आंदोलन की जड़ें: बिजली बिलों का बोझ और फसलों पर बंदरों का कहर
किसानों की परेशानी पुरानी है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अचानक कई गुना इजाफा हो गया है। एक किसान ने बताया, “पुराने मीटर में 500 रुपये का बिल आता था, अब 5 हजार से ज्यादा। ये तो लूट है।” ऊर्जा संकट के कारण घंटों बिजली कटौती भी आम हो गई है, जिससे लोग काफी प्रभावित हो रहे है।
इसके साथ ही, खेतों में बंदरों के झुंड फसलों को चट कर रहे हैं। गेहूं, दालें और सब्जियां—सब बर्बाद। किसान नेता पिंटू पाल ने कहा, “रात-दिन पहरा देना पड़ता है, फिर भी नुकसान लाखों में। वन विभाग सोया हुआ है।” इन दोहरी समस्याओं ने किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया।
प्रदर्शन की ताकत: नेताओं के नेतृत्व में एकजुट किसान
आंदोलन में पिंटू पाल, गुड्डू पासवान, अखिलेश यादव समेत दर्जनों किसान नेता और सैकड़ों किसान शामिल हुए। नारे लगे— “स्मार्ट मीटर हटाओ, किसान बचाओ!”, “बंदर पकड़ो, फसल बचाओ!”। प्रशासन ने पहले मीटिंग में आश्वासन दिए थे, लेकिन अमल न होने से धरना तेज हो गया। तहसीलदार और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसान पीछे हटने को तैयार नहीं।
रास्ता निकलेगा? एसडीएम कुंदन राज कपूर से UPPCL की योजना और वन विभाग की जिम्मेदारी
समाधान की उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार को यह पत्रक भेज बात रखी जायेगी। संभवतः पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने पुराने स्मार्ट मीटरों को 2027 तक हटाने की योजना बनाई है, जिसमें नई तकनीक से सही बिलिंग सुनिश्चित होगी। बंदर समस्या पर वन विभाग से पकड़कर नौगढ़ के जंगलों में छोड़ने की मांग तेज है। किसान कह रहे हैं, “हमारी फसलें हमारा जीवन हैं, इन्हें बचाओ प्रशासन!”

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