डायट प्राचार्य को एससी एसटी बेटवा ने बुके और मोमेंटो भेंटकर किया सम्मानित

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दी शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं 

शिक्षक सभ्य एवं शांतिपूर्ण राष्ट्र का निर्माता होता है- डायट प्राचार्य


चंदौली। शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सकलडीहा डायट प्राचार्य श्री विकायल भारती से मिलकर एससी एसटी बेसिक टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि मण्डल ने माल्यार्पण बुके और मोमेंटो भेंटकर कर शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। इस दौरान जनपद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण कुमार रत्नाकर सहित निठोहर सत्यार्थी अजय यादव व अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

फोटो – डायट प्राचार्य विकायल भारती को माल्यार्पण कर बुके और मोमेंटो भेंट करते हुए एससी एसटी बेटवा जिला उपाध्यक्ष अरुण रत्नाकर सहित अन्य शिक्षक 


डायट प्राचार्य ने बताया की शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। शिक्षक छात्रों को सुंदर एवं सुरक्षित भविष्य देने के लिए उनके कोमल मन में भारतीय संस्कृति और सभ्यता के रूप में ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ के विचार का बीज रोपित करता है। शिक्षक की भूमिका छात्रों को सिर्फ पढ़ाने तक ही सीमित नहीं है। पढ़ाई के अलावा छात्रों के सामाजिक जीवन से संबंधित दायित्वों का बोध कराना तथा उन्हें समाज निर्माण के योग्य बनाने में भी शिक्षक की ही भूमिका होती है।भविष्य मे छात्र राष्ट्र के विकास का आधार बनते हैं। प्रत्येक शिक्षक का राष्ट्र सेवा के प्रति सबसे बड़ा योगदान है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक विकास में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। एक निपुण शिक्षक अपनी शिक्षण शैली से विद्यार्थियों में राष्ट्रीयता की भावना का विकास सबसे बेहतर ढंग से कर सकता है। शिक्षक यदि चाहे तो उसका छात्र देश का सर्वश्रेष्ठ नागरिक बन सकता है। भारत सहित विश्व में जितने भी महान लोग हुए हैं वह अपने गुरु की शिक्षा की बदौलत ही सर्वश्रेष्ठ बन पाए हैं। छात्र के मन में राष्ट्रीयता का भाव शिक्षक ही जागृत कर सकते हैं। राष्ट्रीयता का भाव ही विद्यार्थियों को देशभक्त और आदर्श नागरिक बनाता है। 

शिक्षक, अबोध बालकों को अच्छा नागरिक बनाकर राष्ट्र निर्माण के अपने दायित्व का निर्वाह करता है। राष्ट्र के चौमुखी विकास के लिए उसके भावी नागरिकों को तैयार करने में शिक्षकों की ही भूमिका सर्वोपरि होती है। प्राचीन काल से हमारे देश में शिक्षक इसी ध्येय से देश के भावी नागरिक तैयार कर रहे हैं। यह कार्य अब भी जारी है। इसलिए सभी लोगों को शिक्षको का अनुकरण और सम्मान करना चाहिए।

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