किसान दिवस: चंदौली में गूंजीं लंबित समस्याएं

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आश्वासनों पर किसानों का भरोसा डगमगाया, निदान नहीं तो बंद किया जाए किसान दिवस-पिंटू पाल

चंदौली। जिले में आयोजित किसान दिवस कार्यक्रमों में किसानों ने खाद की कमी, सिंचाई जल की अनियमित आपूर्ति, बिजली की खराब गुणवत्ता, स्मार्ट मीटर से अधिक बिल आने, नहरों की खुदाई, वन्यजीवों के हमले और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार जैसे लंबे समय से लटके मुद्दों पर आवाज बुलंद की। कई बार शिकायतें दर्ज करने के बावजूद समाधान न मिलने से नाराज किसानों ने आश्वासनों पर ही आश्वासनों का आरोप लगाया। जहां पिंटू पाल सहित कई किसानों ने चेतावनी दी कि समस्याएं न सुलझीं तो किसान दिवस का आयोजन बंद कर दिया जाए और वे खेती छोड़ देंगे।

सिंचाई जल की कमी: नहरों व माइनरों में पानी न पहुंचना, खुदाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंचने, खर पतवार से नहरें, माइनरों के पट जाने खासकर धान रोपाई के दौरान।
खाद व उर्वरक वितरण में देरी: किसानों को समय पर उपलब्धता न मिलना।
बिजली समस्याएं: लो वोल्टेज से ट्यूबवेल बंद होना, बेसमय बिजली कट जाने।
वन्यजीवों का खतरा: जंगली जानवरों से फसलें व जानमाल को नुकसान।
विभागीय भ्रष्टाचार: सिंचाई व अन्य विभागों में कथित घोटाले।
ये मुद्दे वर्षों से लंबित हैं, और किसान बार-बार यही शिकायतें दोहराते रहे। कार्यक्रम कृषि विभाग द्वारा आयोजित किए गए।
अधिकारियों के निर्देश
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को त्वरित निस्तारण के आदेश दिए। उन्होंने सिंचाई, बिजली और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा, “किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पूरा प्लान बनेगा।” मुख्य विकास अधिकारी ने भी किसानों से मौके पर संवाद की सलाह दी। अधिकारियों को बेहतर समन्वय व स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दिए गए।
वन्यजीव से सुरक्षा पर सवाल
रामनगर के डीएफओ ने किसान दिवस पर वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाए। हालांकि, हालिया घटनाओं में उन्होंने बंदरों, जंगली सूअरों, नील गायों को पकड़वाकर जंगलों में छोड़ने को लेकर अपने उच्चाधिकारियों के समक्ष रखने और अग्रिम आदेश आने तक का समय मांगा। किसान इन वादों को रटा-रटाया मानते हैं, क्योंकि पहले भी ऐसे निर्देश अमल में नहीं आए।किसान दिवस के बावजूद जमीनी हकीकत में बदलाव की उम्मीद कम है, जब तक आश्वासन कार्यान्वयन में न बदलें।

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