कर्पूरी ठाकुर का जीवन अमीर-गरीब की खाई को पाटने और सामाजिक समरसता लाने के लिए समर्पित था: पिंटू पाल

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सत्ता नहीं सेवा ही असली राजनीति है, महापुरुषों के विचार युगों-युगों तक जन-जन को दिशा देते रहेंगे

चहनियां,(चंदौली)। क्षेत्र के लक्षु ब्रम्ह बाबा परिसर में महान स्वतंत्रता सेनानी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती बड़े ही श्रद्धा और गर्व से मनाई गई. उपस्थित लोगों ने उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर नमन किया और उनके नक्शे कदम पर चलने का संकल्प लिया.




फोटो : किसान नेता पिंटू पाल जननायक कर्पूरी ठाकुर के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर नमन करते हुए 


इस दौरान किसान नेता पिंटू पाल ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर का जीवन अमीर-गरीब की खाई को पाटने और सामाजिक समरसता लाने के लिए समर्पित था. उन्होंने 1977 में बिहार का मुख्यमंत्री बनने पर मुंगेरीलाल कमीशन की सिफारिशें लागू कीं, जिससे बिहार में पिछड़ों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिला.


गरीब परिवारों के बच्चों के पठन पाठन के लिए मैट्रिक तक की शिक्षा मुफ्त किया. सरकारी कार्यालयों में हिंदी भाषा में कार्य करने के लिए अनिवार्य किया. 05 एकड़ तक की भूमि पर मालगुजारी (लगान) माफ की. 


बिहार की सामाजिक आर्थिक दशा सुधारने के लिए शराब पर प्रतिबंध लगाया था. उन्हें सामाजिक समरसता और गरीबों का मसीहा के लिए वर्ष 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया.


सामाजिक न्याय के प्रणेता जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के विचार और आदर्श हमारे लिए प्रेरणा ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का मार्गदर्शन भी हैं. ऐसे महापुरुषों की जयंती हमें याद दिलाती है कि सत्ता नहीं, सेवा ही असली राजनीति है.


 उनके विचार युगों-युगों तक जन-जन को दिशा देते रहेंगे. अंत में उनके आदर्शों पर चलने, सामाजिक समानता और न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया। 

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