निर्जला व्रत रखकर महिलाएं अपने पुत्र की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना की

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यह व्रत बहुत ही कठिन व्रतों में से एक माना जाता है

जितिया व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व है 

लखनऊ, महिलाएं अपने पुत्र की दिर्घायु और अच्छी स्वास्थ्य की कामना के लिए बुधवार को पूरे दिन निर्जला व्रत रखी और देर शाम जीमूतवाहन देवता का विधि विधान से पूजा- अर्चना किया. वहीं पूरी रात भी निर्जला व्रत रखकर गुरुवार की प्रातः पारण करेंगी.


फ़ोटो : निर्जला व्रत के बाद पूजा अर्चना करती महिलाएं 

प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महिलाएं अपने संतान की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखकर जीमूतवाहन देवता का विधि विधान से पूजा अर्चना करती हैं और दूसरे दिन पारण करती हैं।इसे जीतिया व्रत भी कहा जाता है.इस व्रत का महत्त्व उत्तर प्रदेश सहित बिहार और नेपाल में भी देखा जाता है.

जीवित्पुत्रिका व्रत यानी कि जितिया व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व माना जाता है। इस व्रत को महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। यह व्रत बहुत ही कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। महिलाएं बिना अन्न जल ग्रहण किए इस व्रत को करती हैं और अपनी संतान के बेहतर स्वास्थ्य और सफलता की कामना करती है।

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