पैसा हड़पने व जातिसूचक शब्द से अपमानित करने के मामले में आरोपी की जमानत

वाराणसी। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी, एक्ट) देवकांत शुक्ला की अदालत ने जमीन बेचने के नाम पर धोखाधड़ी कर पैसा हड़पने जाति सूचक शब्द बोलकर अपमानित करने के मामले में आरोपी को जमानत दे दी.
रेवतीपुर (गाजीपुर)/ हाल पता सुसुवाही, थाना चितईपुर निवासी आरोपी विनोद राय को 25-25 हजार रुपये की दो जमानते एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिकांत राय उर्फ चुन्ना राय, विपिन शर्मा व अमित राय ने पक्ष रखा.
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी नाथू गोड़ ने बी०एन०एस०एस० की धारा 175 (3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया कि वह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का सेवानिवृत्त कर्मचारी है तथा सेवानिवृत्ति के बाद प्राप्त धनराशि से वह घर बनाने के लिये जमीन तलाश कर रहा था.
आरोपी विनोद राय ने एक जमीन 2720 वर्गफीट मौजा भीटी, परगना रामनगर, तहसील व जिला वाराणसी में दिखायी. वादी को जमीन पसन्द आने पर उपरोक्त जमीन 33,00,000/- (तैतीस लाख) रूपये में लेना तय हुआ तथा विनोद राय की मॉग पर 1 अगस्त 2020 को अपने घर पर अपने पुत्र अजीत व राज नारायन के सामने 1,51,000/-रू० नकद एडवांस के रूप में विनोद राय को दिया.
पुनः दस लाख रूपये आर०टी०जी०एस० के माध्यम से विनोद राय के बैंक में ट्रान्सफर किया गया. पुनः विनोद राय के कहने व उसकी माँग पर वादी ने सन्जू यादव अपने परिचित से दिनांक 13 अगस्त 2020 को बैंक के माध्यम से 10,00,000/-रू० विनोद राय के बैंक के खाते में आर०टी०जी०एस० के माध्यम से दिया गया, जो उनके खाते में जमा हुआ.
रजिस्ट्री हेतु आग्रह करने पर विनोद राय रजिस्ट्री का आश्वासन देने लगे. कुछ समय बाद वादी को जानकारी हुयी कि जिस जमीन की खतौनी व दस्तावेज विनोद राय ने वादी को दिया था यह फर्जी व कूटरचित है. रूपया वापस मॉगने वादी जब विनोद राय के पास गया तो वह आज-कल में देने का टाल मटोल करता रहा.
वादी 17 जुलाई 2024 को 08:30 बजे छल से एडवांस के रूप में लिये गये 21,51,000/-रू० की माँग करने विनोद राय के घर गया तो अरोपी तैश व गुस्से में आकर वादी व उसके पुत्रों को भद्दी-भद्दी गालियों देते हुये जाति सूचक शब्द बोला कि तुम अपना दिया रूपया भूल जाओ, तुम मुझे नहीं जानते मैं गाजीपुर का रहने वाला हूँ.
मेरे प्रदेश के तमाग माफिओं से संबंध है तथा वादी व उसके परिवार को जान से खत्म करने की धमकी दिया. जिसकी सूचना 18 जुलाई 2024 को पुलिस आयुक्त वाराणसी को दी गयी लेकिन कोई कार्यवाही अभियुक्त के विरूद्ध नहीं हुयी. तो वह थक हारकर न्यायालय की शरण ली।