उत्तर प्रदेश की धरती अब उगलेगी तेल

एक दर्जन से अधिक स्थानों पर प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम व खनिज भंडार होने के संकेत, ड्रिल का काम शुरू
लखनऊ। यूपी के गोंडा नवाबगंज क्षेत्र के तटीय इलाकों में जमीन के अंदर प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम व खनिज भंडार होने के संकेत मिले हैं. ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन) ने इसकी पुष्टि के लिए सेस्मिक सर्वे व थ्रीडी मैपिंग शुरू कराई है.
प्रक्रिया शुरू होने पर लोगों ने भविष्य की उम्मीदों को संजोना शुरू कर दिया है. ओएनजीसी की तरफ से अल्फा जियो इंडिया लि. ने क्षेत्र के उमरिया, होलापुर काजी, कल्यानपुर सहित एक दर्जन इलाकों में जमीन के अंदर खनिज भंडार मिलने की संभावनाओं को देखते हुए सर्वे के लिए जमीन में ड्रिल करने का काम शुरू किया है. कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एंड कंसल्टेंट टू पेट्रोलियम एडवाइजर मृत्युंजय सिंह ने बताया कि भू वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट से सभी क्षेत्रों का सर्वे किया था. सैटेलाइट सर्वे में उक्त एक दर्जन इलाकों में प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम व खनिज भंडार होने के संकेत मिले हैं.
रॉकेट से किया जाएगा विस्फोट
इन सभी स्थानों पर जमीन के अंदर 100 फिट गहराई में ड्रिल करके उसके अंदर रॉकेट से विस्फोट किया जाएगा. रॉकेट जमीन में करीब पांच से सात किलोमीटर नीचे तक जाएगा. इससे उठने वाली तरंगों का सेंसर मशीन से सर्वे कर डाटा इकट्ठा किया जाएगा. सेंसर का डाटा परीक्षण के लिए ओएनजीसी भेजा जाएगा.
सर्वे टीम ने डेरा डाला
अल्फा जियो कंपनी ने ओएनजीसी द्वारा बताए गए प्वाइंट्स पर सर्वे करने वाली टीम के साथ डेरा डाल दिया है. जमीन के अंदर ड्रिल करने का काम शुरू किया गया है. कंपनी ने एक दर्जन से अधिक स्थानों पर जमीन में खोदाई का काम शुरू कर दिया है. अल्फा कंपनी के कर्मचारी अंबिका प्रसाद चौधरी ने बताया कि उनके साथ करीब डेढ़ सौ लोग काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ने 15 दिसंबर से आजमगढ़ से सर्वे शुरू किया है. सैटेलाइट के सर्वे में मिले प्वाइंट्स पर ड्रिल करके उसमें विस्फोट करके तरंगों को इकट्ठा किया जा रहा है.
जिलाधिकारी ने खोदाई और सर्वे की दी अनुमति
अल्फा जियो इंडिया लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर केएम राव ने गत माह डीएम नेहा शर्मा को पत्र देकर कार्रवाई के बारे में अवगत कराते हुए अनुमति मांगी थी. इस पर डीएम ने नवाबगंज क्षेत्र के गांवों में सेस्मिक सर्वे व थ्रीडी मैपिंग के लिए जनवरी में ही अनुमति दे दी थी. सहयोग के लिए एडीएम आलोक कुमार को जिम्मेदारी सौंपी है.
क्या है सेस्मिक सर्वे व थ्रीडी मैपिंग?
सेस्मिक सर्वे व थ्रीडी मैपिंग का मतलब भूकंपीय सर्वेक्षण और भूकंपीय मानचित्र बनाना है. इसके माध्यम से पता चलता है कि जमीन के अंदर कौन-कौन से तत्व और खनिज उपलब्ध हैं. अभी क्षेत्र के अन्य स्थानों पर ड्रिलिंग की जाएगी.इसके माध्यम से पूरी जानकारी हासिल की जाएगी.
फसल नुकसान की भरपाई कर रही है कंपनी
किसानों के खेतों में सर्वे वाली जगह पर हुए फसल के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी की तरफ से 1500 से 2000 रुपये दिए जा रहे हैं. क्षेत्र में खनिज भंडार होने की संभावना की जानकारी से क्षेत्र के लोग खुश हैं. रामकुमार, दिनेश, राजेश , रमेश, संजय व गोलू का कहना है कि जमीन के अंदर खनिज भंडार मिलने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा और देश की सूरत बदल जाएगी।