वैचारिक संकलन से ही मानवीय मूल्यों तक पहुँचा जा सकता है – अर्जुन आर्या

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चन्दौली, सकलडीहा : क्षेत्र के खड़ेहरा गाँव में रविवार को दोपहर 12:30बजे मु. जोखू सिद्दीकी के आवासीय परिसर में अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा व अल्पसंख्यक समाज की दलगत नीति से हटकर एक वैचारिक संकलन की संगोष्ठी की गयी । जिसमें सामाजिक न्याय एवं राजनैतिक परिस्थितियों, नैतिक मूल्यों, मानवीय धर्मों, जातीय गुटों से फैली मतभेदीय असमानताओं से ऊपर उठकर सही वक्त पर सही निर्णय लेने, आर्थिक मुक्ति और समाज में फैली विषमताओं पर विस्तार से समसामयिक चर्चा करते हुए पुनः शिक्षा पर प्रगाढ़ बल दिया गया । वहीं बुद्ध, रविदास, फुले, पेरियार तथा डॉ. अम्बेडकर के जीवन की आर्थिक तंगी के दंश को झेलते हुए असंभव व असंगठित समाज को एक पटल पर लाने पर भी प्रकाश डाला गया ।




वहीं कार्यक्रम के बतौर मुख्य अतिथि अर्जुन प्रसाद आर्या ने शिक्षा पर विशेष बल देते हुए कहा कि शिक्षा मानव समाज के विवेक, ज्ञान, समझ और समर्पण की भावना, मानवीय सम्पदा की वृद्धि, समृद्धि की मार्ग प्रशस्त कर मूलभूत आवश्यकता को विकसित करती है । राजनीतिक, धार्मिक, वैचारिक या सैन्य प्रकृति की गतिविधियों से ऊपर उठकर जरूरतमंद लोगों को बिना किसी प्रतिकूल भेदभाव के जीवन रक्षक पहुँच और स्वीकृति सहायता प्रदान करना ही असली मानवीय धर्म है ।



वहीं मु. जोखू सिद्दीकी ने कहा कि दलितों पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के सूत्रधार बने डॉ. भीमराव आंबेडकर ने एक शानदार संविधान के जरिए इस परिवर्तन का ब्लूप्रिंट पेश किया तो मा. कांशीराम नें उसे धरातल पर उतारा और भारतीय राजनीति और समाज में एक बड़ा परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाई ।



बृजमोहन कुशवाहा ने बुद्ध रविदास पेरियार डॉक्टर अंबेडकर और कांशीराम साहब के विचारों को चरितार्थ करते हुए खुद व खुद से प्रेम करनें पर बल दिया । मोमबत्ती कि संज्ञा देते हुए बताया कि एक मोमबत्ती जलते हुए पिघलती जाती है लेकिन अन्तत: अपने समाप्ति तक चले जाने के बाद भी असीमित पीड़ा सहन करके भी दूसरे को प्रकाश देनें का कार्य बन्द नहीं करती । जीवन में आप चाहे जितनी अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ लें, कितने भी अच्छे-अच्छे शब्द सुन लें, लेकिन जब तक आप उनको अपने जीवन में नहीं अपनाते, तब तक उसका कोई फायदा नहीं होगा ।

 
इस वैचारिक संगोष्ठी के अवसर पर लल्लन कुमार (प्रधानाध्यापक), अमरेश कुमार (अधिवक्ता), सुभाष राम (अधिवक्ता ), इंद्रजीत शर्मा, शमीम मिल्की, रामबिलास (शिक्षक), महेंद्र यादव, जीतेन्द्र प्रताप, रामलाल मौर्या, केशव राजभर, श्रवण राजभर, आनन्द प्रकाश, रमेश राय, डॉ. जयप्रकाश मौर्य, रामपूजन राय, त्रिलोकी नाथ, कन्हैया, रामहरख चौधरी, सारनाथ राय, मु. अनीश, नजमुजमा, रियासत अली, रामआश्रय आर्या, राधेश्याम सहित अन्य ने संबल प्रदान किया ।

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