मुगलसराय : मुन्ना पाल की मौत पर परिजनों ने उठाए सवाल, पिंटू पाल बोले- हर पहलू की हो निष्पक्ष जांच

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मुगलसराय, चंदौली। सरगम इंटरप्राइजेज पाइप कंपनी के 50 वर्षीय कर्मचारी मुन्ना पाल की सोमवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद भिसौड़ी गांव और आसपास के इलाके में खलबली मच गई। घटना को लेकर किसान नेता पिंटू पाल ने प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग करते हुए कहा कि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, कंपनी की सुरक्षा एवं विद्युत व्यवस्था और कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी सहित सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, मृतक के परिजन और ग्रामीण भी घटना के समय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराकर उसकी तकनीकी जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

परिजनों के अनुसार मुन्ना पाल रविवार रात करीब नौ बजे अपनी नियमित शिफ्ट के लिए कंपनी पहुंचे थे। उनकी ड्यूटी रात नौ बजे से सोमवार सुबह नौ बजे तक निर्धारित थी। ड्यूटी पूरी करने के बाद सोमवार सुबह जब वह कंपनी परिसर से बाहर निकले तो कंपनी के बाहर सड़क पर अचानक लड़खड़ाकर गिर पड़े। बताया गया कि काफी देर तक वह सड़क पर पड़े रहे। बाद में परिजन और ग्रामीण उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक के परिजनों ने घटना के बाद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि मुन्ना पाल को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाता तो संभव है कि उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने कंपनी परिसर और आसपास की विद्युत व्यवस्था की जांच कराने की मांग करते हुए करंट लगने की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आशंका की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के पूर्व प्रधान लाल बाबू यादव और ग्राम प्रधान महेंद्र यादव का कहना है कि घटना से संबंधित करीब 10-15 मिनट की महत्वपूर्ण सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सामने आनी चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि कंपनी के बाहर और परिसर में लगे कैमरों की पूरी रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराकर पुलिस द्वारा कब्जे में ली जाए तथा तकनीकी विशेषज्ञों से उसकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुन्ना पाल कंपनी से निकलने के बाद किस स्थिति में थे, कब सड़क पर गिरे और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में कितना समय लगा।
परिजनों के अनुसार मुन्ना पाल को पहले लतीफ हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। परिजन जब उन्हें लेकर बीएचयू पहुंचे तो चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिवार का कहना है कि घटना के बाद अस्पताल के संबंध में मिली अलग-अलग जानकारी के कारण उन्हें इधर-उधर जाना पड़ा, जिससे उपचार में देरी हुई। इस पूरे घटनाक्रम की भी जांच की मांग की गई है।
किसान नेता पिंटू पाल ने कहा कि किसी भी परिवार के सदस्य की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत बेहद गंभीर मामला है। ऐसे में जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक की पूरी समय-सीमा और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि परिवार को न्याय नहीं मिला तो ग्रामीणों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विवेचना के बाद ही हो सकेगी। जांच में सीसीटीवी फुटेज, कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था, कर्मचारी की ड्यूटी का समय, घटनास्थल की परिस्थितियां और अस्पताल पहुंचाने की समय-सीमा समेत सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। फिलहाल परिजन और ग्रामीण पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

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