भाकियू टिकैत की मांग पर बुधवार को दोबारा क्रय केंद्र खुलेंगे – मणि देव चतुर्वेदी

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चंदौली। पुरे प्रदेश मे धान खरीद क़ी प्रक्रिया 28 फ़रवरी तक चलाने का शासनादेश जारी हुआ था। मगर चंदौली जिले क़ी खरीद 6 फ़रवरी को यह कहकर बंद कर दी गयी कि जिले की धान लेने का लक्ष्य पूरा हो चूका है। जबकि जिले में अभी भी 10 प्रतिशत किसान धान बेचने से वंचित रह गए जिनका निचले इलाके मे मोथा चक्रवत की बारिश से डूब गया था.जिले के किसान इस फैसले को लेकर स्तब्ध और परेशानहाल हो गए थे।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत इस तुगलकी फरमान के खिलाफ सड़क से विधान सभा तक लड़ाई लडने का एलान किया था। इस विषय पर भाकियू टिकैत के मण्डल प्रवक्ता और किसान नेता मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि संगठन द्वारा शासन प्रशासन को एक दिन का समय दिया गया था।
शासन प्रशासन हरकत मे आया और जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए डिप्टी आर एम ओ राघवेद्र प्रताप सिंह को भाकियू टिकैत से बात करने को निर्देशित किया। 
तमाम पदाधिकारियों की मौजूदगी मे डिप्टी आरएमओ ने जिलाधिकारी का सन्देश दिया कि प्रशासन ने दो दिन का समय माँगा है और कहा कि बुधवार को प्राथमिकता के आधार पर जिन किसानों की तौल हो गयी है और अंगूठा नहीं लग पाया है।
 उनका अंगूठा लगेगा, जिन किसानों का धान क्रय केन्द्रो पर गिरा हुआ है या बाकी बचा हुआ धान बेचने से रह गए है, उन किसानों का धान लिया जाएगा, जिन किसानों ने टोकन लिया है या जिनका धान बिल्कुल भी नहीं बिक पाया है।
इन सभी किसानों का प्राथमिकताओं के आधार पर बुधवार को नजदीकी क्रय केंद्रों पर समस्या दूर की जाएगी| किसानों का धान शत प्रतिशत लिया जाएगा।
 इस आश्वासन को संबंधित अधिकारी ने लिखकर दिया है। मंडल प्रवक्ता ने कहा कि जिले के किसानों के साथ कोई हीला हवाली बर्दास्त नहीं की जाएगी। किसानों का धान शत प्रतिशत लिया जाएगा। प्रशासन को लक्ष्य होता है, किसानों का नहीं, किसानों का धान बिकना चाहिए, लक्ष्य आदि से किसानों का कोई लेना देना नहीं होता है।
 किसानों का मतलब अपनी उपज बेचना है और सरकार का दायित्व है कि एमएसपी पर फसलों की खरीद करे। भाकियू टिकैत जिले के किसानों के साथ मजबूती से खड़ा है। ज़िलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासन द्वारा मांगा गया समयावधि बुधवार को जिले के दोबारा क्रय केंद्र नहीं खोले गए तो किसान बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर अपना धान लेकर कूच करेंगे।
जरूरत पड़ी तो जिले के किसान विधान सभा लखनऊ मे भी धान बेचने का काम करेंगे. किसान आंदोलन के समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि किसान देश मे कहीं भी अपनी उपज बेच सकते है।
 किसानों को संसद भवन और विधान सभा भवन से अच्छी मंडी कहाँ मिलेगी. जिले के धान बेचने से वंचित रह गए किसान बुधवार को नजदीकी क्रय केंद्रों पर जाकर अपना धान बेचे. अगर कोई समस्या आती है तो नजदीकी संगठन के पदाधिकारी से सम्पर्क करें।

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