बुद्ध के तार्किक विचारों से दुनिया ने की तरक्की, भारत आज भी पाखंड और अंधविश्वास में उलझा—आनंद कुमार त्यागी

भगवान बुद्ध की तर्कशीलता और सम्राट अशोक की धम्म नीति आज भी शांति, करुणा और सामाजिक समानता की प्रेरणा देती है। अंधविश्वास, भेदभाव और सामाजिक अपराधों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों को मजबूत करना जरूरी है। इतिहास के आदर्श तभी सार्थक होंगे, जब उन्हें वर्तमान जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाया जाएगा।

फोटो: आनंद कुमार त्यागी को मोमेंटो देकर स्वागत करते हुए महासंघ 

सारनाथ में धम्म विजय दिवस महोत्सव: बुद्ध के तार्किक विचारों और भारतीय संविधान पर मंथन

वाराणसी। सारनाथ में सम्राट अशोक धम्म विजय दिवस महोत्सव के अवसर पर सम्राट अशोक बौद्ध महासंघ की 22वीं धम्म ज्योति के तत्वावधान में ‘सम्राट अशोक का शासनकाल, वर्तमान भारत, भारतीय संविधान की चुनौतियां और नागरिकों का उत्तरदायित्व’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने भगवान बुद्ध के तार्किक विचारों और देश में व्याप्त अंधविश्वास पर सवाल उठाए। विशिष्ट अतिथि अर्जुन प्रसाद आर्य ने सम्राट अशोक के शासनकाल और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर विचार रखे।

बुद्ध के विचारों से दुनिया ने हासिल की प्रगति

मुख्य अतिथि प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध के तार्किक, विवेकपूर्ण और ज्ञानपरक विचारों से प्रभावित होकर विदेशों से लोग भारत आए और उनके दर्शन को अपनाया। बुद्ध के विचारों से प्रेरणा लेकर दुनिया के अनेक देशों ने प्रगति की और विकास के नए आयाम हासिल किए। उन्होंने कहा कि विश्व के लोग बुद्ध के ज्ञान से प्रेरणा लेकर आज आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंच गए हैं, लेकिन भारत स्वयं पाखंड और अंधविश्वास में उलझा हुआ है।

उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज दुनिया ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा गोबर में खोज रहा है। उनके संबोधन का संदेश तार्किक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विवेकपूर्ण विचारधारा को अपनाकर देश को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

मानव ही मानव का दुश्मन बनता जा रहा: अर्जुन प्रसाद आर्य

विशिष्ट अतिथि अर्जुन प्रसाद आर्य ने सम्राट अशोक के जीवनकाल और शासन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक का शासनकाल शांति, करुणा, नैतिकता और जनकल्याण के संदेश के लिए जाना जाता है। वहीं, वर्तमान समाज में चोरी, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। मानव ही मानव का दुश्मन बनता जा रहा है।

उन्होंने भगवान बुद्ध के ज्ञान और धम्म के प्रसार का उल्लेख करते हुए कहा कि बुद्ध का ज्ञान प्राप्त करने के लिए देश-विदेश के कोने-कोने से लोग नदियां, पहाड़ और समुद्र पार करके भारत आए। बुद्ध के विचारों का प्रभाव दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि आज समाज को बुद्ध की तर्कशीलता, समानता और मानवीय मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि आपसी भाईचारा, शांति और सामाजिक सद्भाव मजबूत हो सके।

भारतीय संविधान और नागरिक उत्तरदायित्व पर जोर

कार्यक्रम का मुख्य विषय भारतीय संविधान की चुनौतियों और नागरिकों के उत्तरदायित्व से भी जुड़ा रहा। संविधान के मूल्यों, सामाजिक समानता, मानवीय गरिमा और नागरिक कर्तव्यों की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई। वक्ताओं के विचारों का केंद्रीय संदेश समाज में विवेक, समानता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता से जुड़ा रहा।

वहीं इंदू मेहता महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अपनी जनता पार्टी ने कहा नारी शिक्षा ही धरती की मूल प्रगति का आधार है। नारी दो घरों का विकास करती है, इसलिए नारी शिक्षा पर विशेष बल देना अत्यंत आवश्यक है। हमें अपने घर-परिवार और समाज में सभी लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना होगा। जब नारी शिक्षित होगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव होगा।

आज विद्यालयों की स्थिति और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम नारी शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। एक शिक्षित नारी केवल अपना भविष्य नहीं सँवारती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी उज्ज्वल बनाती है।