डीडीयू मंडल में ट्रैक्शन पावर व्यवस्था मजबूत, छह माह में कई अहम काम
डीडीयू मंडल में छह महीने के दौरान 38.05 किमी एल्युमिनियम कैटेनरी वायर का कॉपर कॉन्टैक्ट वायर से बदलाव, 18.77 किमी पुराने कॉन्टैक्ट वायर का प्रतिस्थापन और 18 किमी साइडिंग का विद्युतीकरण किया गया। 700 से अधिक दैनिक ट्रेनों के परिचालन के बीच विद्युत मांग के बेहतर प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है।
चंदौली। बढ़ते ट्रेन परिचालन के अनुरूप पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में ट्रैक्शन पावर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 38.05 किलोमीटर एल्युमिनियम कैटेनरी वायर को कॉपर कॉन्टैक्ट वायर से बदला गया, जबकि 18.77 किलोमीटर ओवरएज कॉन्टैक्ट वायर का भी प्रतिस्थापन किया गया। इसके अलावा 18 किलोमीटर साइडिंग लाइन का विद्युतीकरण पूरा किया गया। मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के दिशा-निर्देश पर कर्षण वितरण विभाग द्वारा ये कार्य किए गए।

ट्रैक्शन पावर व्यवस्था इलेक्ट्रिक ट्रेनों के परिचालन के लिए आवश्यक विद्युत आपूर्ति से जुड़ी है। इसमें ओवरहेड विद्युत उपकरण और पावर सप्लाई इंस्टॉलेशन प्रमुख हैं। ओवरहेड व्यवस्था में कॉन्टैक्ट वायर के जरिए लोकोमोटिव के पैंटोग्राफ तक बिजली पहुंचती है। ऐसे में इसके नियमित अनुरक्षण और समयबद्ध प्रतिस्थापन को ट्रेन परिचालन की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंडल के बारुण-डाल्टनगंज खंड में 38.05 किलोमीटर एल्युमिनियम कैटेनरी वायर को कॉपर कॉन्टैक्ट वायर से बदला गया। इसके साथ ही मंडल में 18.77 किलोमीटर पुराने कॉन्टैक्ट वायर का प्रतिस्थापन किया गया। रेलवे के अनुसार इन कार्यों से ओवरहेड विद्युत व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने और परिचालन संबंधी व्यवधानों को कम करने में मदद मिलेगी।
प्री-मानसून तैयारियों के तहत भी मंडल में व्यापक कार्य किया गया। ओवरहेड विद्युत व्यवस्था के आसपास पेड़ों की 2,449 पेड़ों तथा 38,057 शाखाओं की आवश्यक छंटाई की गई, ताकि पेड़ों की शाखाओं से विद्युत व्यवस्था में संभावित व्यवधान की आशंका कम हो सके।
इसी क्रम में 18 किलोमीटर विभिन्न साइडिंग लाइनों का विद्युतीकरण पूरा किया गया। इसमें डीडीयू के डाउन मार्शलिंग यार्ड, डाउन डिपार्चर यार्ड, भभुआ रोड डाउन साइडिंग, पहलेजा, पुसौली तथा दुर्गावती अप साइडिंग के दिल्ली छोर शामिल हैं।
डीडीयू मंडल में यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन के साथ विशेष अवसरों पर ट्रेनों की संख्या में भी वृद्धि होती रहती है। वर्तमान में मंडल में यात्री एवं मालगाड़ी मिलाकर प्रतिदिन औसतन 700 से अधिक ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इसके साथ ट्रैक्शन पावर की मांग भी लगातार बदलती रहती है।
कर्षण वितरण विभाग द्वारा विभिन्न ट्रैक्शन पावर क्षेत्रों में विद्युत मांग की निगरानी करते हुए आवश्यकतानुसार विद्युत भार का समायोजन और प्रबंधन किया जा रहा है। इससे उपलब्ध विद्युत क्षमता तथा अनुबंधित अधिकतम विद्युत मांग का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल रही है।
रेलवे के अनुसार प्रभावी ट्रैक्शन पावर प्रबंधन के चलते डीडीयू मंडल इस वित्तीय वर्ष में अब तक अनुबंधित विद्युत मांग सीमा के भीतर रहा है और विद्युत वितरण कंपनियों को कोई अधिभार नहीं देना पड़ा है।
मंडल स्तर पर ओवरहेड विद्युत व्यवस्था, पावर सप्लाई इंस्टॉलेशन, कॉन्टैक्ट वायर का समयबद्ध प्रतिस्थापन, प्री-मानसून अनुरक्षण, साइडिंग विद्युतीकरण और विद्युत भार प्रबंधन पर एक साथ काम किया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि इन प्रयासों से ट्रैक्शन पावर की विश्वसनीयता बढ़ाने और ट्रेन परिचालन को सुरक्षित एवं सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।