हल्की सी बारिश ने खोली विकास के दावों की पोल, सकलडीहा तहसील से सीओ कार्यालय तक पानी ही पानी

डायट परिसर समेत कई सरकारी कार्यालयों में जलभराव, जलनिकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
सकलडीहा, चंदौली। हल्की सी बारिश ने सकलडीहा कस्बे में जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। बुधवार को हुई बारिश के बाद सकलडीहा तहसील परिसर, सीओ कार्यालय, डायट परिसर समेत कई अन्य स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई। सरकारी कार्यालयों के आसपास पानी जमा होने से कर्मचारियों, अधिकारियों और फरियादियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
बारिश के बाद तहसील परिसर में जगह-जगह पानी जमा हो गया। इसी तरह सीओ कार्यालय और डायट परिसर भी जलभराव की चपेट में आ गए। कई स्थानों पर सड़क और परिसर में जमा पानी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हुई, जिन्हें जरूरी काम से सरकारी कार्यालयों में पहुंचना था।
बारिश भले ही बहुत अधिक समय तक नहीं हुई, लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था की स्थिति सामने आने के लिए इतना पानी ही काफी रहा। लोगों का कहना है कि यदि सामान्य बारिश में तहसील और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों के परिसर जलमग्न हो रहे हैं तो तेज बारिश के दौरान स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकारी कार्यालय भी नहीं बच सके
सकलडीहा तहसील क्षेत्र में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। मानसून के दौरान कई स्थानों पर पानी जमा होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस बार भी बारिश होते ही तहसील, सीओ कार्यालय और डायट जैसे महत्वपूर्ण परिसरों में पानी जमा हो गया।
तहसील में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग राजस्व, प्रमाण पत्र, भूमि विवाद और अन्य मामलों के सिलसिले में पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में पानी जमा होने से फरियादियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं अधिकारियों और कर्मचारियों को भी कार्यालय तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डायट परिसर में भी जलभराव
शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान डायट परिसर में भी बारिश का पानी जमा हो गया। परिसर में जलभराव के कारण आने-जाने वालों को परेशानी हुई। लोगों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के पीछे नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्गों की कमी और कई स्थानों पर पानी के निकास में बाधा प्रमुख कारण हो सकते हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं को दूर नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में लगातार बारिश के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं।
विकास के दावों पर सवाल
सकलडीहा में बारिश के बाद उत्पन्न हुई स्थिति ने विकास कार्यों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल मानसून से पहले नालियों की सफाई और जलभराव वाले स्थानों पर व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही जाती है, लेकिन बारिश के बाद फिर वही तस्वीर दिखाई देने लगती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। केवल बारिश के बाद पानी निकालने की कवायद से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए पूरे कस्बे की जलनिकासी व्यवस्था का सर्वे कराकर पानी के प्राकृतिक बहाव और निकासी के रास्तों को दुरुस्त करना होगा।
हल्की बारिश में यह हाल, तेज बारिश में क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हल्की बारिश में तहसील, सीओ कार्यालय और डायट जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर जलमग्न हो गए तो लगातार और तेज बारिश होने पर स्थिति क्या होगी? अगर समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो निचले इलाकों में पानी भरने के साथ ही आम लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
बारिश ने एक बार फिर जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अब जरूरत सिर्फ दावों की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की है।
सकलडीहा की बारिश ने पानी के साथ-साथ व्यवस्था की वह तस्वीर भी सामने ला दी, जिसे शायद कागजों में विकास के आंकड़ों के पीछे छिपा दिया जाता है।