जो पढ़ेगा वहीं आगे बढ़ेगा- अर्जुन प्रसाद आर्या

आगे बढ़ने के लिए हमें डॉ भीम राव अम्बेडकर के जीवन संघर्षों से सीख लेना होगा- लल्लन कुमार
डॉ.अंबेडकर की हर एक सफलता के पीछे उनकी पत्नि रमाबाई का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा- रामसुभाष राम
चंदौली। जो पढ़ेगा वहीं आगे बढ़ेगा. शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान, कौशल और क्षमता प्रदान करती है, जिससे वह बेहतर जीवन जी सकता है और समाज में अपना योगदान दे सकता है. शिक्षा व्यक्ति को न केवल ज्ञान देती है, बल्कि उसे सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करती है. शिक्षा व्यक्ति को बेहतर नौकरी, व्यवसाय और सामाजिक स्थिति प्राप्त करने में मदद करती है. शिक्षा व्यक्ति को अपने जीवन को बेहतर बनाने और समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करती है. उक्त बातें लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन प्रसाद आर्या ने यूपी के जनपद चंदौली के चहनियां विकास खण्ड अंतर्गत तारगांव चकिया में डॉ. अंबेडकर के सपनों को साकार करने हेतू आयोजित एक संगोष्ठी में जनसभा को संबोधित करते हुए कही.
प्रदेश महामंत्री लल्लन कुमार ने शिक्षा के महत्व को समझने और उसे प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि हमें डॉ. भीम राव अम्बेडकर के जीवन संघर्षों से सीख लेना होगा. जिन्होंने अपमान भरी जलालत की जिंदगी में भी विश्व स्तरीय सर्वोच्च शिक्षा हासिल किया और भारत जैसे देश को लचीला एवं कठोर संविधान दिया. जो विश्व में सर्वोच्च ख्याति प्राप्त है. जिसमे समाज के पिछड़ों दलितों आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को समानता का अधिकार निहित कर हम सबको मान सम्मान से जीने बोलने रहने और पढ़ने लिखने की आजादी दिया.बाबा साहेब किसी विशेष एक समुदाय के नहीं अपितु हम सबके महापुरुष हैं.
रेलवे विधि अधिकारी रामसुभाष राम ने कहा कि डॉ.अंबेडकर की हर एक सफलता के पीछे उनकी पत्नि रमाबाई का महत्त्वपूर्ण योगदान था. डा अंबेडकर ने गरीबों मजलूमों वंचितों को समानता का अधिकार दिलाने के लिए अपने चार चार बच्चों को कुर्बान कर दिया.
रामलाल मौर्य ने कहा कि जो कौम अपने महापुरूषों का सम्मान करना नहीं जानती वह कौम अपना इतिहास क्या बना पायेगी. आनन्द प्रकाश मौर्य ने कहा कि शिक्षा एक ऐसी कुंजी है जो सब तालों को आसानी से खोल सकती है अर्थात् हर एक सफलता का राज शिक्षा ही है. हमेंएक दूसरे के प्रति ईर्ष्या द्वेष भावना को मिटाकर एक सूत्र में बंधकर बाबा साहेब डॉ अंबेडकर के सपनों को साकार करना है.
इस दौरान राम अवतार मौर्य, राजेन्द्र राम, महेन्द्र, सुरेन्द्र, संजय, शोभनाथ, मालती देवी, मंगरी देवी, रामनाथ, मंगरू राम, हीरामणि देवी, गीता देवी भोजू राम सहित सैकड़ों महिलाएं पुरुषों एवं बच्चों ने कार्यक्रम में संबल प्रदान किया.
अध्यक्षता मराछू प्रसाद और संचालन ओमप्रकाश मौर्य ने किया