मानवता के सच्चे मसीहा थे रविदास जी -अर्जुन आर्या

भक्ति की शक्ति का प्रमाण देकर विश्व में अपना डंका बजवाया, प्रकांड विद्वानों ने शिरोमणी उपाधि से नवाजा
चंदौली। जिले के चकिया अंतर्गत सोनहुल गांव में मगंलवार को रविदास प्रतिमा का अनावरण कर उनके जीवन संघर्षों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया. कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि अर्जुन प्रसाद आर्या ने फीता काटकर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए
श्री आर्या ने कहा कि रविदास जी मानवता के सच्चे मसीहा थे. रविदास जी मानव कल्याण के लिए ओछी विचार वाले पाखंडियों को भक्ति की शक्ति से ललकारा और एक एक प्रमाण देकर समाज सुधारक बनकर देश विदेश में अपनी डंका बजवाने को मजबूर कर दिया. वहीं रविदास जी अपने सात्विक विचार से प्रकांड विद्वानों के द्वारा संत शिरोमणि की उपाधि से नवाजे गए.
समाजसेवी डॉ. गीता शुक्ला ने कहा कि गुरु रविदास जी के आदर्शों पर हर किसी व्यक्ति को चलकर एवं जाति- पाती से ऊपर उठकर अपने योगदान और समानता और सामाजिक न्याय पर समाज की सेवा करना चाहिए.
लल्लन कुमार ने कहा कि गुरु रविदास जी पाखंडवाद के विरोधी एवं सतमार्ग के प्रणेता थे. जो निर्गुण भक्ति के संत होते हुए भी समाज सुधार पर विशेष बल दिया और बेगमपूरा की परिकल्पना साकार किया.
वहीं एड रामकृत ने कहा कि गुरु रविदास जी ने व्यक्तिगत आध्यात्मिक स्वतंत्रता की खोज में एकता को बढ़ावा दिया. जाति-पाती का घोर खंडन किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया.
इस दौरान संयोजक इंजीनियर गंगा राम, आनंद कुमार, विकास आजाद, शैलेश कुमार, बाबूलाल, शंभू नाथ यादव (ब्लॉक प्रमुख) रामनाथ प्रधान, निक्की प्रधान, कुंदन, कमला देवी, लालबिहारी, नारद, सुरेन्द्र, अजय गुप्ता सहित सैकड़ों महिलाएं पुरुष और बच्चों ने कार्यक्रम में संबल प्रदान किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता लल्लन राम और संचालन रामसुधार ने किया.