प्रशासन की अनदेखी, किसान जला रहे पराली

चंदौली, सकलडीहा। प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन के पराली जलाने पर पाबंदी के आदेश के बावजूद भी किसान पराली जला रहे है। मंगलवार को तहसील क्षेत्र के सलेमपुर और डेढ़ावल के किसान खेत में पराली को चारे के रूप में इस्तेमाल न कर उसके अवशेषों को मल्चर मशीन से मिट्टी में मिलाकर मिट्टी में जीवांश बढ़ाने के बजाय पराली जलाकर प्रदूषण फैला रहे हैं.
प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन के पराली जलाने पर पाबंदी के आदेश के बावजूद भी किसान पराली जला रहे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी वहां नहीं पहुंचा, सांस लेने से लेकर आंखों में जलन से राहगीर परेशान है. स्कूलों की छुट्टी भी ऐन वक्त पर की गई. लगातार बढ़ते प्रदूषण के चलते प्रशासन धूल और धुएं वाले सभी कार्य पर रोक लगा रखी है.
बावजूद भी मंगलवार को सलेमपुर और डेढ़ावल में किसान पराली जलाते नजर आए. जिससे प्रदूषण का असर और बढ़ने का खतरा मड़राने लगा है. प्रशासन की ओर से पराली जलाने से रोकने के लिए कोई कार्यवाही होती नजर नहीं आई.
जबकि केंद्र सरकार द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया है. साथ ही पराली जलाने वाले किसानों पर प्राथमिकी दर्ज कर एमएफएमबी रिकॉर्ड में रेड एंट्री करने, पीएम सम्मान निधि से वंचित करने और जुर्माना का प्रावधान बनाया गया है.
पराली जलाने से जुड़ी कुछ और बातें
पराली जलाने पर गैर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आने वाली धारा 14 के तहत एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना, पांच साल तक की जेल या दोनों हो सकती है.किया जा सकता है. पराली के अवशेषों को मल्चर मशीन से मिट्टी में मिलाकर मिट्टी में जीवांश बढ़ाया जा सकता है. .