सत्तारूढ़ प्रधान सच दबाने के लिए पत्रकार को देता रहा गालियां और धमकी

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भाजपा मंडल अध्यक्ष का हवाला देकर ताकत बताता रहा, गुंडागर्दी के खिलाफ पत्रकार हुए एकजुट 


क्या पीड़ित की आवाज़ उठाना अब अपराध होगा? क्या सच्चाई लिखना जोखिम बन जाएगी?
चंदौली के सकलडीहा के बहरवानी ग्राम सभा के एक पीड़ित की आवाज़ उठाने पर एक स्थानीय पत्रकार को महंगा भुगतना पड़ा। खबर से आहत ग्राम प्रधान जेपी चौहान ने फोन पर पत्रकार को गालियाँ दीं और बार-बार धमकियाँ दीं। अनेक बार विनती करने के बावजूद प्रधान का तेवर नहीं बदला; हर बार वह खुद को “भाजपा नेता” और “मंडल अध्यक्ष” बताते हुए अपनी ताकत का हवाला देते रहे। डरे हुए पत्रकार ने स्थानीय थाने में तहरीर देकर न्याय और सुरक्षा की मांग की।

धमकियों के शब्द इतने तीखे थे—”तुम्हारी दुकान बंद कर दूंगा, तुम्हें सजा दूंगा”—कि वे सिर्फ एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी को डराने के लिये पर्याप्त थे। घटना का ऑडियो वायरल होते ही स्थानीय पत्रकारों में रोष फैल गया; उन्होंने मिलकर कार्रवाई की माँग की और एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि शीघ्र ही उच्च अधिकारियों से मिलकर इस गुंडागर्दी के खिलाफ कदम उठाया जाएगा।
यह कदम केवल व्यक्तिगत हमला नहीं है; यह लोकतंत्र के लिए चेतावनी भी है। क्या पीड़ित की आवाज़ उठाना अब अपराध माना जाएगा? क्या सच्चाई लिखना जोखिम बन जाएगी? अगर आज एक कलम दब गई, तो कल हजारों आवाज़ें खामोश हो सकती हैं। प्रशासन से तुरंत निष्पक्ष जांच और पत्रकारों की सुरक्षा की ठोस व्यवस्था की माँग उठती है। समाज को तय करना होगा—क्या हम सच बोलने वालों की रक्षा करेंगे या उनकी आवाज़ दबने देंगे।

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